Iran और United States के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ दो देशों का मुद्दा नहीं रहा। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो India की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे आम आदमी से लेकर सरकार तक सभी प्रभावित होंगे।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी
भारत अपनी करीब 85% तेल जरूरतें आयात करता है। ऐसे में अगर ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल $110-$120 प्रति बैरल के पार जाता है, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई तेजी से बढ़ेगी।
रुपये पर दबाव और घाटा बढ़ेगा
जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है। कमजोर रुपया मतलब—मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। साथ ही करंट अकाउंट डेफिसिट भी बढ़ेगा।
शेयर बाजार में गिरावट का खतरा
युद्ध और अनिश्चितता का असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ता है। विदेशी निवेशक (FPI) पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर निवेश करते हैं। इससे सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे निवेशकों को नुकसान होगा।
सप्लाई चेन पर बड़ा असर
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां से एक-तिहाई तेल सप्लाई होती है। अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो भारत के आयात-निर्यात पर असर पड़ेगा। खासकर चाय, बासमती चावल और दवाइयों के एक्सपोर्ट को नुकसान हो सकता है।
GDP और फिस्कल डेफिसिट पर असर
अगर युद्ध लंबा चला, तो भारत की GDP ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। साथ ही सरकार का खर्च बढ़ेगा और फिस्कल डेफिसिट भी बढ़ सकता है। इससे देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव आएगा।
आम आदमी पर सबसे बड़ा असर
महंगाई बढ़ने से सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ेगा। खाने-पीने की चीजों से लेकर ट्रांसपोर्ट तक सब कुछ महंगा हो जाएगा, जिससे घरेलू बजट बिगड़ सकता है।
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सरकार के लिए क्या हैं विकल्प?
सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल कर सकती है और नए व्यापारिक रास्ते खोज सकती है। इससे कुछ हद तक नुकसान को कम किया जा सकता है।






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