दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड अब $98 प्रति बैरल के आसपास आ गया है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह Donald Trump द्वारा ईरान के साथ समझौते की उम्मीद जताना है।
देसी भाषा में कहें तो—“तेल का भाव थोड़ा ठंडा पड़ा है, अब सबकी नजर पेट्रोल पर है!”
ईरान डील की उम्मीद से बाजार में राहत
Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत पॉजिटिव दिशा में बढ़ रही है और जल्द बड़ा समझौता हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो Strait of Hormuz फिर से पूरी तरह खुल सकता है।
इसका मतलब साफ है—तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
देखिए, कच्चे तेल की कीमत गिरने से सीधे-सीधे राहत मिल सकती है, लेकिन भारत में फ्यूल प्राइस सिर्फ इंटरनेशनल रेट पर नहीं तय होता। इसमें टैक्स, ट्रांसपोर्ट और रुपये-डॉलर का रेट भी जुड़ा होता है।
देसी अंदाज में—“सिर्फ तेल सस्ता होने से पंप पर तुरंत राहत नहीं मिलती भाई!”
किन फैक्टर्स पर निर्भर है फ्यूल प्राइस
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है:
- इंटरनेशनल क्रूड ऑयल प्राइस
- रुपये की मजबूती या कमजोरी
- केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स
- डिमांड और सप्लाई
अगर ये सारे फैक्टर साथ में पॉजिटिव रहे, तभी आम आदमी को असली राहत मिलती है।
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आगे क्या हो सकता है?
अगर ईरान के साथ डील फाइनल हो जाती है और Strait of Hormuz खुल जाता है, तो आने वाले दिनों में तेल और सस्ता हो सकता है। इससे भारत में भी धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की उम्मीद बन सकती है।
लेकिन तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद करना थोड़ा जल्दबाजी होगी।





