NEET PG 2025 के कट-ऑफ कम करने को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। अब इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना साफ रुख रख दिया है। सरकार का कहना है कि कट-ऑफ घटाने से डॉक्टरों की योग्यता पर कोई आंच नहीं आएगी। मामला फिलहाल Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान चर्चा में है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
तीसरे राउंड की काउंसलिंग में NEET PG 2025-26 सत्र के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम कर दिया गया। इसी फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि यह सिर्फ सीट भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया है, योग्यता से इसका सीधा संबंध नहीं है।
केंद्र सरकार ने क्या दिया तर्क?
सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि NEET-PG का मकसद डॉक्टर बनने की न्यूनतम योग्यता तय करना नहीं है। यह काम पहले ही एमबीबीएस परीक्षा पास करके पूरा हो जाता है।
NEET-PG सिर्फ सीमित पोस्टग्रेजुएट सीटों के लिए मेरिट लिस्ट तैयार करने का तरीका है। यानी सभी अभ्यर्थी पहले से ही लाइसेंस प्राप्त एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जिन्होंने कठिन पढ़ाई और परीक्षा पास की है।
कट-ऑफ कम करना क्यों जरूरी बताया गया?
केंद्र ने दलील दी कि कई बार सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में कट-ऑफ कम करना एक प्रशासनिक कदम है, ताकि उपलब्ध सीटों का सही उपयोग हो सके।
सरकार ने यह भी बताया कि 2017 से अब तक कई बार कट-ऑफ में बदलाव किया गया है। साल 2023 में कुछ श्रेणियों में यह शून्य तक भी गया था, लेकिन इससे चिकित्सा व्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
मरीजों की सुरक्षा पर क्या कहा गया?
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने साफ कहा कि यह चिंता बेबुनियाद है। सभी चयनित उम्मीदवार पहले से ही रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं और स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के योग्य हैं।
पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग के दौरान वे सीनियर फैकल्टी और विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में काम करते हैं। यानी इलाज में लापरवाही की गुंजाइश नहीं रहती।
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आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर Supreme Court of India के फैसले पर टिकी है। अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि कट-ऑफ कम करना नियमों के अनुरूप है या नहीं।
फिलहाल केंद्र का साफ संदेश है – डॉक्टरों की बुनियादी योग्यता पहले ही तय हो चुकी है, NEET-PG सिर्फ मेरिट के आधार पर सीट बांटने का जरिया है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि तथ्यों को समझने की जरूरत है।






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