गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने साफ शब्दों में कहा है कि गुजरात सरकार राज्य के जंगलों और अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि गुजरात में अरावली क्षेत्र और उससे जुड़े वन इलाकों में खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध है और आगे भी किसी तरह की खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नई परिभाषा लागू
वन मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को गुजरात में पूरी तरह लागू किया गया है। इसके तहत स्थानीय जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले सभी भू-भाग को पर्वत माना गया है। साथ ही, दो या अधिक पहाड़ों के बीच 500 मीटर तक का क्षेत्र भी अरावली क्षेत्र में शामिल किया गया है, ताकि किसी तरह की कानूनी खामी न रह जाए।
कोर और इको-सेंसिटिव जोन में खनन पूरी तरह बंद
श्री मोढवाडिया ने स्पष्ट किया कि गुजरात सरकार ने संरक्षित क्षेत्र, इको-सेंसिटिव जोन, रिजर्व फॉरेस्ट, वेटलैंड और CAMPA प्लांटेशन साइट्स को ‘कोर और इनवायोलेट ज़ोन’ घोषित किया है। इन इलाकों में खनन पर पूरी तरह पाबंदी है। सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और हराभरा गुजरात मिल सके।
अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट से हरियाली की नई शुरुआत
वन मंत्री ने ‘अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ का जिक्र करते हुए बताया कि इस परियोजना के तहत गुजरात के साबरकांठा, अरावली, बनासकांठा, मेहसाणा, महिसागर, दाहोद और पंचमहल जिलों में कुल 3,25,511 हेक्टेयर वन क्षेत्र को शामिल किया गया है। साल 2025-26 में 4,426 हेक्टेयर क्षेत्र में 86.84 लाख स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
आक्रामक वनस्पति हटाकर संरक्षण पर जोर
अंत में मंत्री ने बताया कि अरावली क्षेत्र में फैल रही अकेशिया और लैंटाना जैसी आक्रामक वनस्पतियों को 150 हेक्टेयर क्षेत्र से हटाया गया है। आने वाले वर्ष 2026-27 में इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 4,890 हेक्टेयर में पौधारोपण और संरक्षण कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है और भूजल संरक्षण में भी इसकी अहम भूमिका है।





