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आज रात खत्म होगा ‘दीदी’ का राज? ममता बनर्जी ने इस्तीफा न दिया तो बंगाल कौन चलाएगा?

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज रात बड़ा संवैधानिक ड्रामा देखने को मिल सकता है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने साफ कह दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उनका कहना है कि “हम चुनाव हारे नहीं हैं, नैतिक जीत हमारी हुई है।” ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर आज 8 मई की रात विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाता है, तो फिर बंगाल की सत्ता किसके हाथ में रहेगी?

विधानसभा का कार्यकाल आज रात होगा खत्म

भारतीय संविधान के मुताबिक किसी भी राज्य विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है। संविधान के अनुच्छेद 172 के अनुसार जैसे ही तय समय पूरा होता है, विधानसभा अपने आप भंग मानी जाती है। इसके लिए अलग से किसी आदेश की जरूरत नहीं पड़ती।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज Sanjay Kishan Kaul के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में पैदा हुआ यह हालात बेहद असामान्य है। अगर विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाता है तो मुख्यमंत्री भी तकनीकी रूप से अपने पद पर नहीं रह सकतीं।

ममता बनर्जी के इस्तीफे पर क्यों मचा बवाल?

चुनाव में हार के बाद भी ममता बनर्जी का रुख काफी सख्त दिखाई दे रहा है। उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर वोट लूटने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन पर दबाव बनाकर कुर्सी छोड़ने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा तेज है कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देतीं तो क्या राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है। लोगों के बीच भी यही सवाल घूम रहा है कि “दीदी आखिर कब तक कुर्सी पर बनी रहेंगी?”

संविधान क्या कहता है?

संवैधानिक विशेषज्ञ Ashwani Dubey के अनुसार मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल के पास यह अधिकार है कि वह मुख्यमंत्री को पद से हटा सकते हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल विधानसभा के प्रति जवाबदेह होते हैं। जैसे ही विधानसभा का कार्यकाल खत्म होता है, मंत्रिपरिषद भी प्रभावी रूप से समाप्त मानी जाती है। इसलिए इस्तीफा सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जरूरी संवैधानिक कदम होता है।

अगर ममता इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या होगा?

नियमों के मुताबिक विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले मुख्यमंत्री राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हैं। इसके बाद राज्यपाल उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम जारी रखने की अनुमति देते हैं, जब तक नई सरकार शपथ नहीं ले लेती।

लेकिन अगर ममता बनर्जी इस्तीफा देने से इनकार कर देती हैं, तो उनका कार्यकाल अपने आप समाप्त हो जाएगा। ऐसे हालात में राज्यपाल उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी नियुक्त नहीं कर पाएंगे। इससे बंगाल में प्रशासनिक असमंजस की स्थिति बन सकती है।

बंगाल की सत्ता आखिर किसके हाथ जाएगी?

अगर मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म हो जाता है और नई सरकार बनने में देरी होती है, तो राज्यपाल की भूमिका सबसे अहम हो जाएगी। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे ताकि प्रशासन ठप न पड़े।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि आने वाले कुछ घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ममता बनर्जी आखिरकार इस्तीफा देंगी या फिर बंगाल में नया संवैधानिक विवाद खड़ा होगा।

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