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भाजपा मंडल अध्यक्ष पर आदिवासी महिला सरपंच का बड़ा हमला

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खबरवाणी

भाजपा मंडल अध्यक्ष पर आदिवासी महिला सरपंच का बड़ा हमला

“5% कमीशन दो, नहीं तो पंचायत नहीं चलने देंगे”
जातिगत अपमान, धमकी और राजनीतिक दबाव के आरोपों से शाहपुर की राजनीति में भूचाल

शाहपुर। बैतूल जिले के शाहपुर क्षेत्र में पंचायत राजनीति का बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम पंचायत भौंरा की आदिवासी महिला सरपंच मीरा धुर्वे ने भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं उपसरपंच महेंद्र सिरोठिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक बैतूल और हरिजन कल्याण थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में जातिगत अपमान, धमकी, राजनीतिक दबाव और पंचायत कार्यों में “5 प्रतिशत कमीशन” मांगने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।

सरपंच मीरा धुर्वे का आरोप है कि भाजपा मंडल अध्यक्ष अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पंचायत कार्यों में लगातार दखल दे रहे हैं। शिकायत के मुताबिक उन्हें बार-बार जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और कहा गया — “तू आदिवासी महिला है, तुझे पंचायत चलाने की क्या समझ है।” विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

“कमीशन नहीं तो काम बंद”

शिकायत में दावा किया गया है कि ग्राम गुरगुंदा में चल रहे सीसी रोड निर्माण कार्य को दबाव बनाकर रुकवा दिया गया। सरपंच का आरोप है कि पंचायत में होने वाले शासकीय और अशासकीय कार्यों की राशि में से 5 प्रतिशत कमीशन मांगा गया और रकम नहीं देने पर कार्य स्वीकृत नहीं होने देने की धमकी दी गई।

डर और दबाव में पंचायत चला रही हूं”

आदिवासी महिला सरपंच ने आवेदन में कहा है कि वह ईमानदारी से पंचायत संचालन करना चाहती हैं, लेकिन लगातार राजनीतिक दबाव और प्रताड़ना के कारण स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका जताते हुए उसकी जिम्मेदारी भी महेंद्र सिरोठिया पर बताई है।

राजनीति गरमाई, पंचायत व्यवस्था पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद शाहपुर क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। स्थानीय स्तर पर इसे पंचायती राज व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप और आदिवासी महिला जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने का गंभीर मामला माना जा रहा है। ग्रामीणों के बीच भी चर्चा है कि क्या प्रभावशाली राजनीतिक पदों पर बैठे लोग पंचायतों को अपनी “कमाई का जरिया” बना रहे हैं?

अब सबकी नजर पुलिस कार्रवाई पर

मामले में जातिसूचक टिप्पणी, महिला जनप्रतिनिधि को प्रताड़ित करने, पंचायत कार्यों में बाधा उत्पन्न करने और राजनीतिक पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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