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महंगी गैस से बढ़ेगा जंगलों पर संकट: ताप्ती सेवा समिति ने कहा– कीमतों पर तुरंत पुनर्विचार जरूरी

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खबरवाणी

“महंगी गैस से बढ़ेगा जंगलों पर संकट: ताप्ती सेवा समिति ने कहा– कीमतों पर तुरंत पुनर्विचार जरूरी”

बुरहानपुर। ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमतों में हालिया भारी वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे केवल आर्थिक नहीं बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय संकट की शुरुआत बताया है। समिति ने कहा कि गैस की कीमतों में लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि के कारण छोटे व्यापारी, होटल संचालक और ढाबा व्यवसायी अब सस्ते विकल्प के रूप में लकड़ी एवं कोयले की ओर रुख करने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे जंगलों पर सीधा दबाव बढ़ेगा।

समिति के अनुसार देश में पहले ही वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 21 से 24 प्रतिशत ही है, जबकि आदर्श स्थिति में यह 33 प्रतिशत होना चाहिए। ऐसे में यदि व्यावसायिक स्तर पर भी लकड़ी की मांग बढ़ती है, तो अवैध कटाई और वन क्षरण की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में लगभग 25 से 30 प्रतिशत ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी आबादी पहले से ही पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर लगातार दबाव बना हुआ है।

ज्ञापन में आगे कहा गया कि लकड़ी एवं कोयले के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होगी, जो एलपीजी की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक प्रदूषण फैलाता है। इससे वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और आम नागरिकों, विशेषकर श्रमिक वर्ग, में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। समिति ने चिंता जताई कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण के बड़े-बड़े अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती ईंधन लागत इन प्रयासों को कमजोर कर सकती है, क्योंकि वृक्षों के संरक्षण और निगरानी की व्यवस्था अभी भी प्रभावी नहीं है।

ताप्ती सेवा समिति ने भारत सरकार से मांग की है कि कमर्शियल गैस की कीमतों पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए तथा छोटे एवं मध्यम व्यवसायियों के लिए राहत या सब्सिडी प्रदान की जाए। साथ ही, सौर ऊर्जा, बायोगैस और अन्य स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतियां लागू की जाएं। समिति ने यह भी आग्रह किया कि वन संरक्षण कानूनों को सख्ती से लागू करते हुए अवैध कटाई पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समिति ने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले समय में एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है, जिसका प्रभाव केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जलवायु, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा। इस अवसर पर अध्यक्ष श्रीमती सरिता भगत उपाध्यक्ष अत्ताउल्लाह खान रियाज हुल हक अंसारी विनय पुनीवाला राजकुमार बचवानी वरुण चौधरी डॉ यूसुफ खान राजेश भगत धर्मेंद्र सोनी आदि लोग मौजूद थ

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