जानें, केले के वेस्ट से बनाई जाने वाली चीजें और इससे होने वाले लाभ
केले के कचरे से कर सकते हो करोड़ो रूपये की कमाई जाने पूरी जानकारी केले की खेती करने वाले किसान इसके फल के अलावा इसके वेस्ट यानि इसके कचरे से भी अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। आप सोच रहे होंगे की केले के पेड़ के वेस्ट यानि कचरे से भला क्या कमाई की जा सकती है। लेकिन इस बात को सच कर दिखाया है तमिलनाडु के एक किसान ने। यह किसान केले के पेड़ के कचरे से कई प्रकार की चीजें बनाते हैं और उसे बेचकर करोड़ों की कमाई करते हैं। आज हम इस पोस्ट में आपको ऐसे ही एक किसान के बारे में बताएंगे जो केले के कचरे से करोड़ों रुपए कमाते हैं, तो जानते हैं इस किसान की सफलता की कहानी।
कौन है ये किसान
इस किसान का नाम पीएम मुरुगेसन है। ये तमिलनाडु के मदुरै के मेलाक्कल गांव में रहते हैं। पैसे नहीं होने की वजह से यह आगे पढ़ नहीं पाएं। कक्षा 8वीं के बाद ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाने लगे। इन्होंने केले की खेती के बाद बचे कचरे से करोड़ाें रुपए कमा लिए और आज आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने हुए हैं। उन्होंने केले के कचरे से बैग, टोकरी जैसे कई उपयोगी समान बनाकर बेचे और आज गांव के सैकड़ों व्यक्तियों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा मुरुगेसन ने केले के फाइबर से रस्सी बनाने के काम को सरल व प्रभावशाली बनाने के लिए एक मशीन भी तैयार की है। इस मशीन की मदद से केले के कचरे से मजबूत रस्सी बनाई जा सकती है। इनके द्वारा केले के कचरे से बनाए प्रोडक्ट की मांग देश में ही नहीं विदशों में भी होने लगी है। इससे इनका उत्साह और अधिक बढ़ गया है। अब उन्हें इस बिजनेस में काफी अच्छा लाभ हो रहा है।
कैसे आया केले के वेस्ट (कचरे) से चीजें बनाने का आइडिया
एक दिन उन्होंने अपने गांव में ही एक व्यक्ति को फूलों की माला बनाते समय धागे की जगह केले के फाइबर का उपयोग करते हुए देखा। फिर क्या था, उनके मन में भी केले के कचरे से उपयोगी चीजें बनाने का आइडिया आया और यही से शुरू हुई उनकी सफलता की कहानी। उन्होंने कचरे से विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुओं काे बनाना शुरू किया। हालांकि इस काम के शुरुआती दौर में उन्हें काफी परेशानी आई लेकिन बाद में ये काम उनके लिए काफी आसान हो गया। इनकी बनाई हुई वस्तुओं को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जाने लगा और आज वे एक सफल किसान की श्रेणी में आते हैं। केले के कचरे से ये न केवल खुद करोड़ों रुपए की कमाई कर रहे हैं बल्कि अन्य किसानों को भी रोजगार दे रहे हैं।
चीजें बनाने के लिए केले की किस वेस्ट चीज का करते हैं इस्तेमाल
जैसा कि केले के पेड़ के पत्ते, तना और फल आदि सबको उपयोग में लिया जाता है। लेकिन इसके तने से उतरने वाली दो सबसे बाहरी छाल कचरे में चली जाती है। इन छालों को अनुपयोगी समझ कर जला दिया जाता है या इसे ‘लैंडफिल’ के लिए भेज दिया जाता है। लेकिन मुरुगेसन ने केले के इसी कचरे का उपयोग किया और इससे कई प्रकार की उपयोगी चीजें बनाना शुरू कर दिया।
केले से कचरे से रस्सी बनाने के लिए किया मशीन का आविष्कार

उन्होंने वर्ष 2008 में अपने परिवार के सहयोग से केले के पेड़ के कचरे से रस्सी बनाने का काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने नारियल की छाल से रस्सियां बनाने के लिए जो मशीन उपयोग में लाई जाती है उसमें केले का कचरा डाला। उन्हें लगा की जैसे इस मशीन से नारियल के कचरे से रस्सी बन जाती है, उसी तरह केले के कचरे से रस्सी बन जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पर इस पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और केले के फाइबर की प्रोसेसिंग मशीन बनाने के लिए कई बार प्रयास किया। उन्होंने वर्ष 2017 में पुरानी साइकिल की रिम और पुल्ली का इस्तेमाल करके एक ‘स्पिनिंग डिवाइस’ बनाया। इस मशीन से केले के कचरे की कताई हो जाती थी। इसके बाद उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) से संपर्क किया और उनसे सहायता के लिए अनुराेध किया। इस पर संस्थान के अधिकारी इस मशीन को देखने आए। उन्हें मुरुगेसन ये मशीन काफी पसंद आई और उन्होंने क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी इस मशीन के उपयोग की सलाह दी। इस बात से मुरुगेसन का विश्वास बढ़ने लगा। उन्होनें अपनी मशीन को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपए का खर्चा किया। इसके बाद उन्होंने इस मशीन को अपने नाम से पेटेंट भी करवाया।
क्या है इस मशीन की विशेषता
ये मशीन ऑटोमैटिक है। इस मशीन की सबसे खास बात ये हैं ये मशीन रस्सी बनाने के साथ ही दो रस्सियों को एक साथ जोड़ भी देती है। किसान के अनुसार इस मशीन से उनके पास हैंड व्हील मैकेनिज्म मशीन थी जिससे एक व्हील पर पांच लोगों की जरूरत पड़ती थी और इस मशीन से 2500 मीटर लंबी रस्सी बनाई जा सकती थी। लेकिन अब इस नई मशीन की सहायता से 15000 मीटर तक की रस्सी आसानी से बनाई जा सकती है। इस मशीन पर सिर्फ चार व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है। इससे कम समय और लागत में रस्सी बनकर तैयार हो जाती है।
इस मशीन से क्या-क्या सामान बनाते हैं
इस मशीन की सहायता से टोकरी, चटाई, बैग इत्यादि वस्तुएं बनाई जा सकती है। इनके इस काम में आसपास के किसान ही नहीं महिलाएं भी रूचि दिखा रहीं हैं। आज वे क्षेत्र के 300 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल है, जो इनके लिए घर पर चीजें बनाने काम करती है और तैयार माल यहां पहुंचाती हैं। इस तरह फ्री टाइम में घर पर रहने वाली महिलाओं को भी इससे काम मिल रहा है। इनके यहां हर साल 500 टन केले के ‘फाइबर वेस्ट’ की प्रोसेसिंग की जाती है।
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अब तक मिल चुके है कई पुरस्कार

मुरुगेसन को उनके द्वारा किए गए मशीन के आविष्कार और कार्यों के लिए 7 राष्ट्रीय पुरस्कार और राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग की ओर से उन्हें ‘पीएमईजीपी’ (प्राइम मिनिस्टर एम्प्लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम) अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्रालय से ‘राष्ट्रीय किसान वैज्ञानिक पुरस्कार’ और जबलपुर में कृषि विज्ञान केंद्र से ‘सर्वश्रेष्ठ उद्यमी पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया है। इस तरह आज मुरुगेसन सभी किसानों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गए हैं।
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