खबरवाणी
सरपंच प्रतिनिधि रंजीत यादव, पंचायत सचिव ने निजी फर्म के साथ मिलकर कागजी कार्यों पर लाखों रुपये भुनाए……
मेसर्स श्री कृष्णा एंटरप्राइजेस’ और जीएसटी का फर्जीवाड़ा रिटर्न न भरने से भ्रष्टाचारियों के जेबों में गई पंचायत के विकास कार्यों की राशि….
अशोकनगर। जनपद पंचायत अशोक नगर की ग्राम पंचायत रांवसर एक बार फिर सरकारी धन के खुलेआम बंदरबांट और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत राज व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए, रांवसर में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिल भुनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच और पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने पंचायत शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत द्वारा किए गए भुगतानों के जब जीएसटी विवरण खंगाले गए, तो एक ऐसा संगठित भ्रष्टाचार उजागर हुआ, जिसमें सरपंच प्रतिनिधि, पंचायत अधिकारियों और निजी फर्मों की साठगांठ की परतें एक-एक कर उधड़ती चली जा रही हैं।
पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘मेसर्स श्री कृष्णा एंटरप्राइजेस’ नाम की फर्म को किए गए भुगतानों से जुड़ा है। ग्राम पंचायत रांवसर में विभिन्न सामग्री आपूर्ति और विकास कार्यों के नाम पर मेसर्स श्री कृष्णा एंटरप्राइजेस के बिल प्रस्तुत किए गए थे। जब इन बिलों पर दर्ज जीएसटी नंबर का सत्यापन पोर्टल पर किया गया, तो वर्तमान परिस्थिति में उस जीएसटी नंबर के तहत कोई भी रिटर्न दाखिल नहीं पाया गया। हैरानी की बात तो यह है कि यह लापरवाही या धोखाधड़ी सिर्फ आज की स्थिति तक सीमित नहीं है। जिस समय ये बिल ग्राम पंचायत रांवसर में जमा किए गए थे और तत्कालीन अधिकारियों द्वारा इन्हें स्वीकृत कर भुगतान राशि जारी की गई थी, उस समय भी इस फर्म का कोई जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं था। नियमतः किसी भी सरकारी या पंचायत स्तर के भुगतान से पहले फर्म के जीएसटी स्टेटस और उसकी वैधता की जांच करना अनिवार्य होता है। लेकिन अधिकारियों ने आंखें मूंदकर उन बिलों को हरी झंडी दे दी, जिनका टैक्स खजाने में जमा ही नहीं हो रहा था।
भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं खत्म नहीं होता। बिलों की प्राथमिक जांच में एक और सबसे बड़ी गड़बड़ी और तकनीकी खामी सामने आई है, जिसने इस पूरे लेनदेन की नीयत पर सीधा हमला बोला है। पंचायत में लगाए गए इन बिलों पर किसी भी प्रकार की बैंक खाता संख्या आईएफएससी कोड या बैंक शाखा का कोई उल्लेख तक नहीं था। सरकारी प्रक्रियाओं के तहत किसी भी वेंडर या एजेंसी के बिल पर उसका बैंक विवरण होना अनिवार्य होता है, ताकि राशि सीधे संबंधित फर्म के अधिकृत बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सके। परंतु रांवसर पंचायत में बिना किसी बैंक खाता संख्या वाले बिलों को न केवल स्वीकार किया गया, बल्कि उनका आनन-फानन में भुगतान भी कर दिया गया। बिना बैंक विवरण के बिल पास होना यह साफ दर्शाता है कि भुगतान की आड़ में किसी अन्य व्यक्ति या फर्जी खाते का उपयोग करके पैसों का हेरफेर किया गया है।
इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों और राजनीतिक गलियारों में बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ग्राम पंचायत द्वारा निकाली गई विकास कार्यों की राशि का उपयोग धरातल पर हुआ ही नहीं है। भ्रष्टाचारी सरपंच प्रतिनिधि रंजीत यादव और पंचायत सचिव और संबंधित विभागीय अधिकारियों ने निजी फर्म ‘मेसर्स श्री कृष्णा एंटरप्राइजेस’ के साथ मिलकर यह पूरा नेटवर्क तैयार किया। फर्म के नाम पर बिना जीएसटी रिटर्न वाले और बिना बैंक विवरण वाले कागजी बिल तैयार किए गए और सरकारी राशि आपस में बांटकर हड़प ली गई। जब बिलों में खाता संख्या ही नहीं थी, तो आखिर यह पैसा किसके खाते में ट्रांसफर किया गया यह सवाल अपने आप में इस साठगांठ का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी फर्मों और भ्रष्ट प्रतिनिधियों के इस गठजोड़ पर क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा।
इनका कहना है-
पहले इसकी जांच करा लेंगे उसके बाद कह पाएंगे क्या मैटर है, और जांच कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
शैलेंद्र यादव
जनपद पंचायत सीईओ अशोक नगर





