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Nikay Chunav : भाजपा की गले की फांस बना विकास वार्ड, बागियों से परेशान पार्टी 

तीन बागी उम्मीदवार कर सकते चुनाव परिणाम प्रभावित

बैतूल – कल नाम वापसी के बाद नगर पालिका परिषद के चुनाव की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अधिकांश वार्डों से नामांकन भरे कांग्रेस और भाजपा के कई प्रमुख नेताओं ने टिकट मिलने की आस से से नामांकन वापसी के अंतिम दिन का इंतजार किया लेकिन पार्टी की अधिकृत सूची में नाम ना आने पर इनमें से अधिकांश नेताओं ने नाम वापस ले लिया है।

बैतूल नगर के 33 वार्डों में से वार्ड क्रं. 28 विकास वार्ड अनारक्षित इस दौरान सबसे अधिक चर्चाओं में रहा क्योंकि इस वार्ड से भाजपा की टिकट चाहने वाले लगभग 8 दावेदारों ने नामांकन भरा था और उनमें से नाम वापसी के बाद भी तीन दावेदारों ने पार्टी लाइन से हटकर बागी बनकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए।

विकास वार्ड में बागी क्या गुल खिलाएंगे?

बैतूल नगर पालिका परिषद के 33 में से सिर्फ वार्ड क्रं. 28 विकास वार्ड ही ऐसा क्षेत्र है जहां भाजपा ने घोषित उम्मीदवार को हटाते हुए पूर्व नपा अध्यक्ष आनंद प्रजापति को अंतिम समय में बी फार्म देकर भाजपा उम्मीदवार बना दिया है। लगभग 20 वर्षों से नगर पालिका में विभिन्न पदों पर निर्वाचित हो रहे आनंद प्रजापति को इस बार भाजपा ने तीनों ही घोषित सूचियों में उम्मीदवार नहीं बनाया था और विकास वार्ड से भी नए नाम इंद्रजीत आलूवालिया को टिकट दे दी थी। लेकिन नाम वापसी के कुछ समय पहले ही अचानक आनंद प्रजापति को उम्मीदवार बनाया गया और उन्हें कमल का फूल चुनाव चिन्ह प्राप्त हो गया।

इसी बीच घोषित उम्मीदवार इंद्रजीत ने नाम वापस लेते हुए इसे भाजपा द्वारा सिक्खो का अपमान निरूपित किया। क्योंकि भाजपा ने उस सिक्ख समाज को एक ही टिकट दी थी जो वर्षों से भाजपा का वोट बैंक बना हुआ है। नाम वापसी के बाद विकास वार्ड में 6 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं इनमें भाजपा के आनंद प्रजापति, कांग्रेस की प्रेरणा शर्मा तथा निर्दलीय क्रमश: मीनाक्षी शुक्ला, पूनम खण्डेलवाल, महेंद्र जागने एवं ललित जुमड़े शामिल है।

मिली जानकारी के अनुसार इन चार निर्दलियों में से मीनाक्षी शुक्ला, पूनम खण्डेलवाल एवं ललित जुमड़े इन तीन उम्मीदवारों ने भाजपा से दावेदारी की थी। लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण ये बागी हो गए। इनके बागी होने के बाद इसका नुकसान भाजपा उम्मीदवार को हो सकता है। मीनाक्षी शुक्ला का कहना है कि भाजपा को वार्ड के निवासी को ही उम्मीदवार बनाना था। लेकिन पार्टी ने दूसरे वार्ड के नेता पर भरोसा किया। इसलिए वार्ड के हित में वो चुनाव मैदान में है।

पत्रकारों से चर्चा करते हुए मीनाक्षी ने तल्ख तेवर में कहा कि भाजपा को विकास वार्ड में एक भी योग्य प्रत्याशी नहीं मिला। इसलिए इस अनारक्षित वार्ड में बाहरी और अन्य पिछड़ा के प्रत्याशी को थोप दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए मीनाक्षी शुक्ला का कहना है कि अनारक्षित सीट होने से सामान्य वर्ग को ही उम्मीदवार बनाया जाना था। मुझे नहीं तो पूनम खण्डेलवाल को भाजपा उम्मीदवार बना देती ताकि स्थानीय उम्मीदवार होने से विकास वार्ड का उचित विकास हो पाता।

विकास वार्ड के फैसले पर रहेगी सभी की नजर

राजनैतिक समीक्षकों का यह मानना है कि चर्चाओं में बने विकास वार्ड में भाजपा के तीन बागी तो मैदान में है ही वहीं उम्मीदवार घोषित होने से नाराज इंद्रजीत आलूवालिया भी भाजपा उम्मीदवार की जीत में रोड़े अटका सकते हैं। इसी तरह से वार्ड निवासी एवं सक्रिय युवा भाजपा नेता भी भाजपा की जीत में बाधा बन सकते हैं क्योंकि वे भी अपने समर्थक को टिकट दिलाने में असफल रहे। वैसे कहा जा रहा है कि आनंद प्रजापति पिछले एक वर्ष से इस वार्ड से पार्षद बनने के लिए सक्रिय है। अब देखना यह होगा कि आनंद की सक्रियता और पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल खिलाने में कितनी महत्पूर्ण भूमिका निभाता है?

वहीं बागी चुनाव परिणाम को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं इस पर हार-जीत तय होगी। इनमें से एक बागी ललित जुमड़े कुंबी समाज से हैं और इनका संजय कालोनी क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। दूसरी भाजपा की बागी निर्दलीय उम्मीदवार राष्ट्रीय स्वयं संघ के सेवा भारती, विद्या भारती एवं गायत्री परिवार से जुड़ी पूनम खण्डेलवाल भी भाजपा और संघ की विचारधारा के मतदाताओं को बड़ी संख्या में प्रभावित कर सकती हैं। इसी तरह से तीसरी बागी मीनाक्षी शुक्ला राष्ट्रीय स्वयं संघ के समरसता मंच संयोजक बनाई गई थीं। समीक्षकों का यह भी मानना है कि भाजपा विचारधारा के चार उम्मीदवारों के कारण कांग्रेस की युवा तथा स्वच्छ छवि की प्रेरणा शर्मा को इसका लाभ मिल सकता है।