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सीएमएचओ के ‘विवादित’ बयान पर भड़के नरसिंहपुर के पत्रकार; कलेक्टर परिसर में ज्ञापन सौंप रखी बड़ी मांगें
नरसिंहपुर। जिले में पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के एक वायरल वीडियो को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वीडियो में सीएमएचओ द्वारा जिले के पत्रकारों पर “नकारात्मकता फैलाने” का आरोप लगाए जाने के बाद पत्रकारों में व्यापक आक्रोश देखने को मिला है। इसी संदर्भ में जिले के समस्त पत्रकारों ने एसडीएम को कलेक्टर परिसर में ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर मांगें रखीं।
पत्रकारों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा है कि यदि किसी विशेष पत्रकार पर आरोप हैं तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाए, न कि पूरे पत्रकार समुदाय को कटघरे में खड़ा किया जाए। साथ ही उन्होंने सीएमएचओ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने या अपने शब्द वापस लेने की मांग भी की है।
मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा जारी पत्र पर भी पत्रकारों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि पत्र की भाषा से षड्यंत्र की “दुर्गंध” आती है, जिसकी वे घोर निंदा करते हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सीएमएचओ द्वारा यह कहना कि पत्रकारों की वजह से डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर रहे और सीधे जबलपुर रेफर कर रहे हैं, पूरी तरह अनुचित है। पत्रकारों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी विभाग की है और उसकी विफलताओं का ठीकरा पत्रकारों पर फोड़ना उचित नहीं है।
पत्रकारों ने जिला चिकित्सालय में पदस्थ सभी डॉक्टरों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कई शासकीय डॉक्टर निजी क्लीनिक और नर्सिंग होम का संचालन कर रहे हैं। इस पर तत्काल प्रभाव से नियम अनुसार कार्रवाई करने और एक विशेष टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
विगत दिनों नीलेश मिश्रा की पुत्री शुभांगी की कथित गलत इलाज के कारण हुई मृत्यु के मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। पत्रकारों ने पूछा है कि संबंधित अस्पताल—जगदीश हॉस्पिटल—की अनुमति किस श्रेणी में है और वहां किस प्रकार का उपचार किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि बच्ची का इलाज करने वाला नर्सिंग स्टाफ योग्य था या नहीं।
ज्ञापन में जिले के सभी नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और सोनोग्राफी केंद्रों की सूची सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा बाहर से आने वाले डॉक्टरों की जानकारी साझा करने और निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को नियम अनुसार वेतन दिलाने की भी मांग उठाई गई है।
पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि इन सभी बिंदुओं पर पारदर्शिता बरती जाए और जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन रोकने वाले पत्रकारों के नाम इस प्रकार हैं विमल वानगात्री पंकज गुप्ता सतीश दुबे ताराचंद पटेल देवी प्रसाद बबलू कहार प्रीतम रजक विनय श्रीवास्तव संदीप दुबे ललित श्रीवास्तव संतोष दुबे गोविन्द चौरसिया पिंटू वर्मा गणेश प्रजापति आदि पत्रकार उपस्थित रहे





