MPEB Transformer – जेई के खेल की जांच करने पहुंचे एजीएम

फर्जीवाड़ा उजागर होने पर अफसरों में मचा हडक़म्प

MPEB Transformer – बैतूल – जिले के बोरदेही के अंतर्गत आने वाले ग्राम बामला में तत्कालिन जेई द्वारा नियम-कायदों को ताक पर ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर लाइन खड़ी कर लगाए गए ट्रांसफार्मर के फर्जीवाड़े को सांध्य दैनिक खबरवाणी द्वारा सिलसिलेवार प्रकाशित करने से विद्युत कंपनी के अफसरों में हडक़म्प मचा हुआ है।

आज तत्कालिन जेई के द्वारा किए गए फर्जीवाड़े की जांच करने के लिए जिला मुख्यालय से एजीएम ग्राम बामला पहुंचे हैं। अब इस मामले में आगे की कार्यवाही क्या होती है यह देखने लायक होगी।

फर्जी लेटर पेड की सामने आई कहानी | MPEB Transformer

बामला में लगाए गए ट्रांसफार्मर का जब खबरवाणी ने खुलासा किया तो फर्जी लेडपेड की कहानी सामने आई है। अब इस कहानी में कितनी सत्यता है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा। बोरदेही के वर्तमान जेई संतोष चंदेल ने सांध्य दैनिक खबरवाणी को बताया कि ठेकेदार दिलीप पोटफोड़े ने उन्हें आवेदन दिया है कि उनके नाम के फर्जी लेटर पेड छपवाकर यह ट्रांसफार्मर लगवाया गया था।

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इसमें उनका कोई रोल नहीं है। जिस व्यक्ति ने उनके लेटर पेड का उपयोग किया उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। श्री चंदेल ने बताया कि इस आवेदन के आधार पर वे पुलिस थाने बोरदेही में कार्यवाही के लिए आवेदन दे रहे हैं। पुलिस इसकी जांच करेगी। किसानों की अज्ञानता का लाभ ऐसे फर्जी ठेकेदार उठा लेते हैं।

विद्युत कंपनी पर भारी पड़ रहा भलावी | MPEB Transformer

विद्युत कंपनी के अफसर इस मामले में चेहते जेई इंद्रपाल भलावी को बचाने में जुट गए हैं। जबकि देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक दोषी यदि कोई है तो वह सिर्फ और सिर्फ इंद्रपाल भलावी ही हैं क्योंकि इन्हीं की देख-रेख में लाइन खड़ी होने के साथ-साथ इन्हीं के परमिट दिए जाने के बाद ट्रांसफार्मर लगाया गया था और इन्हीं के निर्देश पर ट्रांसफार्मर चार दिनों तक चालू भी रहा था।

इस मामले के उजागर होने पर अब ठीकरा ठेकेदार, किसानों पर फोड़ा जा रहा है। वहीं तत्कालिन जेई को बचाने की जुगत भिड़ाई जा रही है।

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ठेकेदार भी मामले में है दोषी | MPEB Transformer

वर्तमान जेई संतोष चंदेल ने बताया कि ठेकेदार दिलीप पोटफोड़े ने उन्हें आवेदन दिया है कि उनका फर्जी लेटरपेड छपवाया गया है। श्री चंदेल की यह बात गले के नीचे नहीं उतर रही है क्योंकि पेटी कांट्रेक्टर के रूप में काम कर रहे रूपेश गव्हाड़े का यह पहला काम नहीं था।

अगर जांच की जाए तो ऐसे कई काम ठेकेदार दिलीप पोटफोड़े के लाइसेंस पर रूपेश गव्हाड़े ने किए हैं। अगर यह फर्जी लेटर पेड पर हुआ है तो फिर पुराने काम भी फर्जी लेटर पेड पर ही हुए होंगे इसलिए इस मामले में ठेकेदार दिलीप पोटफोड़े और पेटी कांट्रेक्टर रूपेश गव्हाड़े दोनों ही दोषी है।

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लाइन की भूमिका संदिग्ध | MPEB Transformer

जब विभाग ने सुपरविजन राशि जमा करवाके रसीद किसान को दी है और उसके बाद ट्रांसफार्मर लग गया तो जेई, ठेकेदार, पेटी कांट्रेक्टर के साथ-साथ इस इलाके लाइनमेन की भूमिका भी संदिग्ध है। क्योंकि ग्राम में यदि लाइन से संबंधित काम हुआ है और परमिट जारी कर लाइन बंद करवाकर ट्रांसफार्मर को जोड़ा तो कहीं ना कहीं इसमें लाइनमेन भी मिलीभगत से यह सब हुआ होगा। अगर जांच के दायरे में लाइनमेन का भी केंद्र बिंदु बनाकर जांच की जाए तो निश्चित रूप से लाइनमेन तोते की तरह सब उगल देगा।

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इनका कहना…

मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस मामले में उत्तर डिवीजन के एजीएम हितेश सिंह वशिष्ठ को जांच के लिए भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

पीसी गौर, जीएम, बैतूल वृत्त

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