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ग्रामीण विकास की नई क्रांति का शुभारंभ, 125 दिनों के रोजगार, बढ़ी मजदूरी और पारदर्शी व्यवस्था से आत्मनिर्भर बनेंगे गाँव-अर्चना चिटनिस
बुरहानपुर। ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा एक और ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी-राम-जी) का देशव्यापी शुभारंभ किया गया। इसी क्रम में जिला पंचायत बुरहानपुर के सभाकक्ष में जिला स्तरीय जन सम्मेलन एवं शुभारंभ कार्यक्रम विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नेपानगर विधायक सुश्री मंजू राजेंद्र दादू, जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, बुरहानपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, खकनार जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती आरती निलेश चौकसे, जिला पंचायत सदस्य दिलीप पवार, अनिल राठौड़, किशोर शाह, मनोज टंडन, संजय जाधव, गजेंद्र पाटिल एवं निलेश चौकसे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पंचायत पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि संसद से पारित ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी-राम-जी) अधिनियम देश के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और ग्राम स्वावलंबन की दिशा में एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी एवं परिवर्तनकारी निर्णय है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम है। यह अधिनियम गांवों में विकास की नई कार्यसंस्कृति स्थापित करेगा तथा रोजगार, सुशासन और जनभागीदारी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले रोजगार के अवसरों का उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। अब पात्र परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी, आर्थिक असुरक्षा कम होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही यदि मजदूरी के भुगतान में किसी प्रकार की देरी होती है तो उसकी भरपाई भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा होगी।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खेती-किसानी के सबसे महत्वपूर्ण 60 दिनों के दौरान योजनांतर्गत कोई कार्य नहीं कराया जाएगा, ताकि कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध रहें और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इससे कृषि और ग्रामीण रोजगार के बीच संतुलन स्थापित होगा तथा दोनों क्षेत्रों को समान रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। सभी विकास कार्यों का भौगोलिक चिह्नीकरण (जियो टैगिंग), ऑनलाइन अभिलेखीकरण तथा जैविक पहचान आधारित उपस्थिति अनिवार्य की गई है। इससे प्रत्येक कार्य की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी, फर्जीवाड़े एवं अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा तथा सरकारी धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सुनिश्चित होगा। ग्रामीण श्रमिकों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए योजनांतर्गत दैनिक मजदूरी 261 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दी गई है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि यह निर्णय श्रमिकों के सम्मान, उनकी मेहनत के उचित मूल्य तथा उनके जीवन स्तर में सुधार की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इससे लाखों श्रमिक परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने कहा कि वीबी-जी-राम-जी अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब योजना केवल अस्थायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्थायी और जनोपयोगी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण भी करा सकेंगी। इससे त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को वास्तविक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा तथा ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से जल संरक्षण, जल संवर्धन, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, सार्वजनिक परिसंपत्तियों का विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण तथा अन्य जनहितकारी विकास कार्यों को व्यापक स्तर पर गति मिलेगी। इससे गांवों में स्थायी विकास की मजबूत नींव रखी जाएगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब गांवों के विकास की प्राथमिकताएं गांव स्वयं तय करेंगे। ग्राम पंचायतों की भूमिका और अधिकारों का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती मिलेगी और ग्राम पंचायतें विकास की वास्तविक धुरी बनेंगी। उन्होंने कहा कि वीबी-जी-राम-जी अधिनियम विशेष रूप से बुरहानपुर सहित पूरे मध्यप्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर गांव, सशक्त पंचायत, समृद्ध किसान, सम्मानित श्रमिक और विकसित भारत के निर्माण का मजबूत आधार है। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और गांव आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बनेंगे। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी-राम-जी) उसी संकल्प का सशक्त प्रतिबिंब है, जो ग्रामीण भारत के विकास का नया इतिहास लिखेगा तथा विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उपस्थित नागरिकों से कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। जनभागीदारी, पारदर्शिता और सुशासन के बल पर ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।





