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हेडलाइन – गाडरवारा: शहर में चौतरफा विकास, लेकिन सरकारी अस्पताल की 300 मीटर सड़क सालों से बदहाल
एंकर – गाडरवारा में एक तरफ जहां शहर में चौतरफा विकास का दावा किया जा रहा है, दिन-रात सड़कों, नालियों और बड़े नालों के निर्माण के लिए नए-नए टेंडर पास हो रहे हैं, भूमिपूजन और लोकार्पण की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर का एकमात्र शासकीय सिविल अस्पताल प्रशासन की भारी उपेक्षा का शिकार है। अस्पताल परिसर को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली मात्र 300 मीटर की सड़क पिछले कई सालों से बदहाली के आंसू रो रही है, लेकिन इसका सुध लेने वाला कोई नहीं है।
उबड़-खाबड़ सड़क बनी हादसों का सबब
हैरानी की बात यह है कि इस शासकीय अस्पताल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज इलाज कराने आते हैं। अस्पताल का मार्ग पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और जर्जर हो चुका है। ऐसा लगता है कि इस महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान का कोई “धनी-धोरी” (जिम्मेदार) ही नहीं बचा है, जो मुख्य सड़क से अस्पताल के गेट तक की इस बेहद जरूरी 300 मीटर की सड़क का निर्माण करवा सके।
4 साल से लिखे जा रहे पत्र, पर नतीजा ‘सिफर’
यह मामला केवल अनदेखी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी है। समाचार के साथ संलग्न दस्तावेजों के अनुसार:
वर्ष 2022 में ही तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा मुख्य नगरपालिका अधिकारी (नगर पालिका परिषद, गाडरवारा) को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया गया था।
पत्र में स्पष्ट मांग की गई थी कि मुख्य रोड से अस्पताल परिसर के गेट तक सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि पुराना रोड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।
इसके बाद भी कई बार निवेदन, आवेदन और अनुस्मारक (रिमाइंडर) पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रमुख समस्याएं: क्या झेल रहे हैं आम लोग?
1 मरीजों की भारी परेशानी: पूरी तरह उबड़-खाबड़ सड़क होने के कारण गंभीर रूप से बीमार और प्रसूता महिलाओं को अस्पताल तक ले जाने में बेहद कष्ट होता है।
2 बड़ी दुर्घटना का अंदेशा: एम्बुलेंस और निजी वाहनों का इस जर्जर मार्ग से आना-जाना बेहद कठिन हो गया है। गड्ढों के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
3 हजारों लोग प्रभावित: प्रतिदिन अस्पताल आने वाले हजारों मरीज और उनके परिजन इस नारकीय रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
4 दिखावे का विकास: शहर में बड़े-बड़े विकास कार्य और निर्माण तो दिखाए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी अस्पताल की सड़क को पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है।
जनता की मांग: अस्पताल की सड़क का ‘इलाज’ कब?
जिस अस्पताल ने हमेशा से इलाके के गरीब और आम लोगों के स्वास्थ्य की सेवा की है, आज उस अस्पताल की सड़क खुद “इलाज” (मरम्मत) के लिए तरस रही है। जनता अब सीधे तौर पर सवाल उठा रही है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर आगे क्यों नहीं आ रहा? अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन और नगर पालिका परिषद की नींद टूटती है या फिर मरीज इसी तरह जर्जर रास्तों पर हिचकोले खाने को मजबूर रहेंगे।





