दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत–ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया ने दिल्ली में हुए हालिया आतंकी हमले पर भारत के साथ पूरा समर्थन व्यक्त किया।
मोदी–अल्बनीज़ की मुलाकात में क्या-क्या हुआ?
जी-20 के इतर हुई इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने बीते पांच वर्षों में भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों में आई मजबूती पर संतोष जताया। 2020 में रिश्तों को Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा मिलने के बाद दोनों देशों की साझेदारी लगातार गहराती जा रही है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि उच्च-स्तरीय नियमित वार्ताओं से संबंधों को नई गति मिली है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत–ऑस्ट्रेलिया की एकजुटता
दिल्ली में हुए आतंकी हमले पर पीएम अल्बनीज़ ने भारत के प्रति एकजुटता जताई और कहा कि ऑस्ट्रेलिया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमेशा भारत के साथ खड़ा है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा, इंटेलिजेंस साझा करने और डिफेंस पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर चर्चा की।
रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर हुई बड़ी बातचीत
मुलाकात के दौरान कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हुई—
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- परमाणु ऊर्जा और क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
- टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी
- ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा
दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने का फैसला किया।
शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर भी जोर
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पीएम मोदी और अल्बनीज़ ने छात्रों की आवाजाही, रिसर्च सहयोग, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को और बढ़ाने पर सहमति जताई। लोगों से लोगों के जुड़ाव को दोनों देशों के रिश्तों की सबसे मजबूत नींव बताया गया।
पीएम मोदी ने X पर क्या लिखा?
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने X पर लिखा—
“ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज़ के साथ शानदार बातचीत हुई। हमारी रणनीतिक साझेदारी के पांच साल पूरे हो रहे हैं और इस दौरान हमारे रिश्ते नई ऊँचाइयों पर पहुंचे हैं। आज की चर्चा में मैंने खासकर तीन क्षेत्रों—डिफेंस व सिक्योरिटी, न्यूक्लियर एनर्जी और ट्रेड—पर जोर दिया, जहां सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएँ हैं। इसके अलावा शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर भी अच्छी चर्चा हुई।”





