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कठिन परिस्थितियों को सफलता की राह में बाधा न बनने दें : कलेक्टर डॉ. सोनवणे
अरुणिमा सिन्हा और सचिन तेंदुलकर के उदाहरण देकर विद्यार्थियों को किया प्रेरित, यूपीएससी की तैयारी से जुड़े सवालों पर भी किया संवाद
बैतूल। विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों और असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। कोई भी विषम परिस्थिति व्यक्ति की सफलता में स्थायी बाधा नहीं बन सकती। यह बात कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कही।
कलेक्टर ने विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए अरुणिमा सिन्हा और सचिन तेंदुलकर के जीवन के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सफलता पाने के लिए परिस्थितियां हमेशा अनुकूल हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति कितना दृढ़ रहता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि असफलताओं से निराश होकर रुकने के बजाय उनसे सीख लेकर अपनी रणनीति में सुधार करना चाहिए। लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं और रुचि के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध तरीके से तैयारी करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि लक्ष्य तय करते समय केवल व्यक्तिगत सफलता के बारे में न सोचें, बल्कि यह भी विचार करें कि उनके कार्य और उपलब्धियां देश एवं समाज के विकास में किस प्रकार योगदान दे सकती हैं।
प्रॉब्लम सॉल्विंग अप्रोच विकसित करने पर जोर
संवाद के दौरान कलेक्टर ने विद्यार्थियों को हर परिस्थिति में प्रॉब्लम सॉल्विंग अप्रोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएं आना स्वाभाविक है, लेकिन समस्या से घबराने के बजाय उसके समाधान के रास्ते तलाशना चाहिए। असफलता को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उसे भविष्य की सफलता के लिए सीख के रूप में लेना चाहिए।
विद्यार्थियों के सवालों के दिए जवाब
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने सफलता की परिभाषा, रोल मॉडल तथा यूपीएससी की तैयारी से जुड़े विभिन्न सवालों पर चर्चा की और विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करते रहने, असफलताओं से सीखने और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया।





