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आमला। जंगल में प्यासे न रह जाएं वन्यजीव: आमला के वकीलों और समाजसेवियों ने उठाई आवाज; वन विभाग से मांगी जल स्रोतों की जानकारी
आमला । भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही जंगलों में वन्य प्राणियों के लिए पानी का संकट गहराने लगा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए आमला नगर के अधिवक्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर संगठनों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDO) शैलेंद्र बड़ोनिया के नाम नायब तहसीलदार रिचा कौरव को एक लिखित ज्ञापन सौंपा।
सार्वजनिक करने की मांग
वन परिक्षेत्र आमला के अंतर्गत वन्य प्राणियों के लिए पानी की क्या व्यवस्थाएं की गई हैं, उसे सार्वजनिक किया जाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि जंगल में कितने स्टॉप डैम हैं और कितने जलकुंड (झिरिया) सक्रिय हैं, इसकी जानकारी आमजन को होनी चाहिए।
शहर की ओर बढ़ रहा है खतरा
अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय और व्यापारी संघ अध्यक्ष अनिल सोनी ने बताया कि पानी की कमी के कारण अक्सर जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं, जिससे जनहानि और वन्यजीव हानि, दोनों का खतरा बना रहता है। प्यास के कारण कई बार पक्षियों की मौत भी हो जाती है।
जनता करेगी श्रमदान और जल सेवा
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक अनूठी पेशकश भी की है। उन्होंने कहा कि यदि वन विभाग के पास पानी भरने या साफ-सफाई के संसाधनों की कमी है, तो विभाग उन जलकुंडों की लोकेशन सार्वजनिक करे। नगर के दानदाता और समाजसेवी स्वेच्छा से अपने खर्च पर उन जलकुंडों में पानी भरवाने और उनकी सफाई करने के लिए तैयार हैं ज्ञापन के समय रहे प्रगतिशील व्यापारी संघ अध्यक्ष अनिल सोनी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय, सचिन जैन, रविंद्र कुमार देशमुख, मोहम्मद शफी खान, कंचन पटवारी, यशवंत चढ़ोकार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।





