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कृषि आदान विक्रेताओं का हल्लाबोल: खाद के साथ ‘जबरन टैगिंग’ के विरोध में दुकानें बंद, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्टर- हरेन्द्र सिंह शास्त्री
घोड़ाडोंगरी।
कृषि आदान विक्रेताओं की समस्याओं और खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग के विरोध में सोमवार को क्षेत्र के व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया। संयुक्त आह्वान पर 27 अप्रैल को देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल के तहत रानीपुर, बगडोना, बादलपुर, चोपना और पाढर सहित आसपास के क्षेत्रों के खाद-बीज प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों ने घोड़ाडोगरी तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा और व्यवस्थाओं में सुधार की पुरजोर मांग की।
सैंपल फेल होने पर विक्रेता नहीं, कंपनी बने अपराधी
ज्ञापन में विक्रेताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि खाद, बीज और कीटनाशक की सील बंद पैकिंग में यदि नमूना (सैंपल) फेल होता है, तो इसके लिए केवल निर्माता कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया जाए। वर्तमान नियमों के तहत विक्रेताओं पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई का विरोध करते हुए उन्होंने मांग की कि ऐसी स्थिति में विक्रेता को अपराधी के बजाय केवल ‘गवाह’ माना जाए।
प्रमुख मांगें: मार्जिन बढ़ाने और लाइसेंस प्रक्रिया के सरलीकरण पर जोर
व्यापारियों ने शासन के सामने अपनी पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जो उनके व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं:
खाद पर बढ़े कमीशन: खाद में डीलर मार्जिन बेहद कम होने के कारण व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसे बढ़ाकर कम से कम 8% करने की मांग की गई है।
टैगिंग पर पूर्ण रोक: यूरिया या डीएपी के साथ कंपनियों द्वारा जबरन थमाए जाने वाले नैनो यूरिया या अन्य कीटनाशकों (टैगिंग) को तुरंत बंद किया जाए।
लाइसेंस की अवधि: खाद और बीज के लाइसेंस की अवधि को बढ़ाकर 5 वर्ष किया जाए, जबकि कीटनाशक लाइसेंस को आजीवन (Life-time) मान्य किया जाए।
PC की अनिवार्यता खत्म हो: हर साल लाइसेंस में कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (PC) जोड़ने की जटिल प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।
निर्माता पर हो कार्रवाई: सील बंद माल की गुणवत्ता के लिए केवल कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो।
”हम शासन की नीतियों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विक्रेताओं पर थोपे जा रहे अव्यावहारिक नियमों का विरोध कर रहे हैं। बिना गलती के व्यापारियों को अपराधी बनाना न्यायसंगत नहीं है।” > — विरोध प्रदर्शन में शामिल विक्रेता प्रतिनिधि
किसानों को हुई परेशानी, पर व्यापारियों को मिला समर्थन
हड़ताल के चलते सोमवार को खाद-बीज की दुकानें बंद रहने से क्षेत्र के किसानों को खाद और दवाइयों के लिए भटकना पड़ा। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन भविष्य में और उग्र रूप ले सकता है। ज्ञापन सौंपने के दौरान रानीपुर और घोड़ाडोगरी ब्लॉक के बड़ी संख्या में कृषि आदान विक्रेता मौजूद रहे।





