लोकायुक्त की जांच में हो सकता है बड़ा खुलासा
Lokayukt Action – शाहपुर – एकलव्य आदर्श बालक-बालिका विद्यालय में कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जब लोकायुक्त की टीम ने डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए विद्यालय के गार्ड को रंगे हाथों पकड़ा। यह गार्ड विद्यालय में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक इंद्रमोहन तिवारी के लिए रिश्वत ले रहा था। लोकायुक्त ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और बॉड पर रिहा कर दिया है। आरोप है कि इंद्रमोहन तिवारी ने 8 लाख 26 हजार रुपए की रिश्वत कमिश्रर के रूप में मांगी थी और इसी को लेकर ठेकेदार ने लोकायुक्त में शिकायत करने के बाद डेढ़ लाख रुपए देकर इनको ट्रेप कराया है।
क्या है पूरा मामला
आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय बालक-बालिका विद्यालय शाहपुर में भोपाल के ठेकेदार आलोक कुमार सिंह ने सामग्री, उपकरण सप्लाई किए थे। इसके अलावा मेस संचालन का भी ठेका इनके पास था। इनके द्वारा बिल प्रस्तुत करने के बाद भुगतान लेने के प्रयास किए जा रहे थे लेकिन इसको लेकर उनसे 10 प्रतिशत कमिश्रर के रूप में रिश्वत मांगी जा रही थी। जिसकी शिकायत लोकायुक्त में की गई और लोकायुक्त के डीएसपी संजय शुक्ला ने टीम के साथ इंद्रमोहन तिवारी और गार्ड लल्लू सिंग के ऊपर रिश्वत का मामला दर्ज किया है।
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विवादों में रहते हैं इंद्रमोहन | Lokayukt Action

प्राथमिक शिक्षक इंद्रमोहन तिवारी लंबे समय से बैतूल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनकी कार्यप्रणाली हमेशा विवादों में घिरी रहती है। पहले वे जिला शिक्षा केंद्र में पदस्थ थे। उस दौरान एक बड़ा मामला सामने आया था। जिसको लेकर उन पर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगा था। इसके बाद उन्हें 17 जुलाई 2017 को एकलव्य बालक छात्रावास का अधीक्षक बनाया गया।
अगस्त 2022 में दूसरा मामला उस समय सामने आया जब यहां पर एक कार्यक्रम में बाहरी लोगों को बुलाया गया था। इसी कार्यक्रम में छात्राओं को भी शामिल किया गया था। इसको लेकर कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस के आदेश पर इन्हें निलंबित किया गया और विभागीय जांच शुरू की गई थी। श्री तिवारी ने इस मामले में कोर्ट से स्टे लिया था। इन्हें पुन: 25 जनवरी 2023 को एकलव्य विद्यालय में पदस्थ कर दिया गया, लेकिन उसे कोई प्रभार नहीं दिया गया था। अब यह इनका तीसरा मामला सामने आया है।
आदिवासी विकास विभाग में चल रही कमीशनखोरी
लोकायुक्त के द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ने के मामले से साफ हो गया है कि आदिवासी विकास विभाग में जमकर कमीशनखोरी चल रही है। इसका सबसे उदाहरण यही है कि जिस प्राथमिक शिक्षक इंद्रमोहन तिवारी के पास एकलव्य विद्यालय में कोई प्रभार नहीं था तो आखिर ठेकेदार का भुगतान करने के मामले में कमीशन किस आधार पर मांगा जा रहा था। क्योंकि यहां पर प्राचार्य सुरेंद्र कुमार डोनीवाल हैं।
अधीक्षक आशीष यादव है जो आऊटसोर्स से नियुक्त किए गए हैं। प्राचार्य के कार्यालय में लिपिक का कार्य एसएस सरकार देखते हैं। अब देखना यह है कि इस मामले में इंद्रमोहन तिवारी और लल्लू सिंग के अलावा कौन-कौन शामिल हैं। शाहपुर के अलावा क्या जिला मुख्यालय के अधिकारी भी शामिल हैं यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल तो रिश्वतकाण्ड चर्चा का विषय बना हुआ है।






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