
नियुक्त कर्मचारियों को हटाया गया
ICU Closed – बैतूल – जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं बद से बदत्तर होती जा रही हैं। डॉक्टरों की कमी, गंदगी का अंबार और अब जिला अस्पताल का एकमात्र आईसीयू भी बंद हो गया है।
भाजपा सरकार में भले ही करोड़ों रुपए का जिला अस्पताल भवन बना दिया गया हो लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। बहुत ही प्रयास के बाद यहां पर बनाए गए आईसीयू को शुरू कराया गया था जिससे कई गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधाएं मिल रही थीं।
अब वह भी बंद हो गई है। कुछ दिन पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने आशंका व्यक्त की थी कि प्रायवेट अस्पतालों ं को लाभ पहुंचाने के लिए पूरा षड़यंत्र रचा जा रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने जो आशंका व्यक्त की थी वह सच साबित होती दिख रही है।
20 बिस्तर का था आईसीयू | ICU Closed
स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल ने एनएचएम के माध्यम से लगभग 2 करोड़ रुपए की लागत से जिला अस्पताल बैतूल में 20 बिस्तर का आईसीयू तैयार करवाया था। इस आईसीयू में 20 बेड हाईक्वालिटी के, सेंटर मानीटर, सेंटर ऑक्सीजन, सेंटर सेक्शन के अलावा अन्य आधुनिक उपकरण जो मरीजों के उपचार के लिए उपयोग किए जाते हैं वो उपलब्ध थे। आईसीयू बनने के बाद लंबे समय तक स्टाफ की कमी होने के कारण इसे शुरू नहीं किया गया था। बार-बार मांग होने के बाद इसे शुरू किया गया।
8 माह ही मिली सुविधा
8 माह पहले आईसीयू शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने रेडक्रास सोसायटी की मदद से यहां पर 13 कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। इन कर्मचारियों में 6 वार्ड ब्वाय, 4 आया बाई और 3 सफाई कर्मचारी थे। इन 13 कर्मचारियों का प्रतिमाह वेतन 2 लाख 10 हजार रुपए होता था।
अब इन कर्मचारियों का वेतन रेडक्रास सोसायटी के हाथ खड़े करने से बंद हो गया है। जिला अस्पताल ने इन सभी कर्मचारियों को हटा दिया है। जानकारी मिली है कि इन कर्मचारियों की पेमेंट के लिए सिविल सर्जन कार्यालय से एनएचएएम और संचालनालय को कई पत्र भी लिखे गए लेकिन सकारात्मक जवाब आज तक नहीं आया।
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बंद करने खाली कर दिया आईसीयू | ICU Closed
आईसीयू शुरू होने से कई गरीब मरीजों को इस आईसीयू का लाभ मिला और उन्हें नागपुर और भोपाल या फिर प्रायवेट अस्पतालों में जाकर हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ रहे थे। जानकार बताते हैं कि जैसे ही जिला अस्पताल प्रबंधन को संकेत मिले कि आऊटसोर्स कर्मचारी का पेमेंट नहीं मिलेगा तब से जिला अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू में नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था।
कल तक एक आखरी मरीज था जिसकी मौत होने पर अब आईसीयू को बंद कर दिया गया है। अब यहां पर कोई भी नए मरीजों को भर्ती नहंी किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों की अक्षमता का जिलेवासी भुगतेंगे दंश
जिले में बात चाहे सत्ता पक्ष की हो या फिर विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की ही क्यों ना हो? दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों के जनप्रतिनिधियों की अक्षमता के चलते आज जिलेवासियों से एक महत्वपूर्ण सौगात छिन गई। यदि यह जनप्रतिनिधि समय रहते हुए आईसीयू को निरंतर चालू रखने के लिए प्रयास करते तो निश्चित रूप से जिलेवासियों से इतनी महत्वपूर्ण सौगात नहीं छिन पाती और जिले के गरीब मरीज जो कि नागपुर-भोपाल में अपना उपचार नहीं कर सकते थे उन्हें बड़ी राहत मिलती।
लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते अब आईसीयू में ताला लग गया है। हालांकि अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। राजनैतिक इच्छाशक्ति से ऊपर उठकर यदि जनप्रतिनिधि संविदान में दी गई ताकत का उपयोग करें तो वह दिन दूर नहीं कि आईसीयू मय स्टाफ के प्रारंभ हो सकता है।
इनका कहना…
फिलहाल कर्मचारियों को आईसीयू से हटा दिया गया है। कर्मचारियों की व्यवस्था अगर हो जाएगी तो आईसीयू में मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया जाएगा।





