कमेटी जांच के लिए पहुंची बैतूल
Betul Line Man – बैतूल – मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र वितरण कंपनी के दक्षिण संभाग में 7 अप्रैल को हुई लाइनमेन की मौत के मामले में बड़ी कार्यवाही के संकेत मिल रहे हैं। खबरवाणी को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज इस मामले की जांच करने के लिए भोपाल से कमेटी बैतूल पहुंच रही है।
कंपनी ने तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई है और यह कमेटी इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। लाइनमेन दम्मूलाल धुर्वे उम्र 58 साल लाइन का फाल्ट सुधारने के लिए ट्रांसफार्मर पर चढ़े थे। इसी दौरान बंद लाइन चालू हो गई और करंट लगने से लाइनमेन की ट्रांसफार्मर पर ही मौत हो गई थी।
तय हो सकती है जिम्मेदारी | Betul Line Man
विद्युत वितरण कंपनी ने इस मामले को लेकर गंभीरता दिखाते हुए जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में एमडी आफिस भोपाल में पदस्थ एसई आरपी चौबे, मानव संसाधन के उपप्रबंधक बीबी पांचाल और भोपाल के ही उपमहाप्रबंधक मुकुंद नासेरी को नियुक्त किया है।
कमेटी के सदस्य इस मामले में दक्षिण संभाग के पाढर वितरण केंद्र में घटी इस घटना को लेकर जांच करेंगे। जांच में उन सभी बिंदुओं को देखा जाएगा जो इस घटना से संबंधित हैं। जानकार बताते हैं कि इसमें बड़े अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय हो सकती है।
पत्नी का भी नहीं हैं बैंक एकाउंट | Betul Line Man
मृतक दम्मूलाल के परिजनों को घटना के 12 दिन बाद भी आर्थिक मदद नहीं मिल पाई है। जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार दम्मूलाल की पत्नी के नाम से बैंक में खाता नहीं होने के कारण उन्हें अभी तक विभागीय मदद नहीं मिल पा रही है।
उन्हें आर्थिक सहायता के रूप में क्षतिपूर्ति राशि जीपीएफ, गे्रज्यूटी, बीमा सहित अन्य की प्राप्ति नहीं हो पाई है। विभाग के अधिकारी प्रयास कर रहे हैं कि उनका जल्द ही खाता खुल जाए जिससे उन्हें आर्थिक सहायता दी जा सके।
लाइनमेन की मौत पर उठ रहे सवाल | Betul Line Man
ऐसी चर्चा है कि विद्युत वितरण कंपनी में नियमित कर्मचारी के रूप में पदस्थ लाइनमेन दम्मूलाल धुर्वे का वेतन अच्छा खासा था लेकिन उनके जानकार बताते हैं कि वेतन के हिसाब से उनका रहन-सहन नहीं था। मकान भी कच्चा था।
चर्चा यह भी है कि दम्मूलाल का वेतन 90 हजार से 1 लाख के बीच था। लेकिन यह वेतन उनको पूरी नहीं मिल पाती थी। असल में दम्मूलाल सीधे व्यक्ति थे उनसे कुछ लोगों ने चेक ले लिए थे और कुछ लोगों ने उनका एटीएम ले लिया था उनके खाते में जैसे ही पेमेंट डलती थी वैसे ही लोग राशि निकाल लेते हैं।
यही कारण है कि इतनी अच्छी पेमेंट मिलने के बाद दम्मूलाल धुर्वे मुफलिसी की जिंदगी जी रहे थे। यहां तक की वह मकान बनाने का सपना भी पूरा नहीं कर पाए। अगर उनके बैंक खाते की जांच की जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।






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