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नर्सिंग परीक्षा पूरी होने तक छात्रावास से छात्राओं को न निकालने की मांग
शासकीय महाविद्यालय अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास का मामला, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सौंपा ज्ञापन
बुरहानपुर। शासकीय महाविद्यालय अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास, बुरहानपुर में निवासरत छात्राओं से जुड़ा मामला सामने आया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) बुरहानपुर की ओर से अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है कि छात्राओं की नर्सिंग परीक्षा आयोजित होकर पूर्ण होने तक उन्हें छात्रावास से बाहर न किया जाए। परिषद ने छात्राओं की शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से मामले में उचित एवं न्यायसंगत निर्णय लेने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में परिषद ने उल्लेख किया है कि छात्रावास में रहने वाली कुछ छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं। उनके अनुसार छात्राओं की नर्सिंग की पढ़ाई पूरी होने के साथ ही परीक्षा भी अभी आयोजित नहीं हुई है। ऐसे में यदि उन्हें परीक्षा पूर्ण होने से पहले छात्रावास खाली करने के लिए कहा जाता है, तो उनके सामने पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा की तैयारी करने में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
पांच वर्ष से छात्रावास में रह रही छात्राओं का उल्लेख
ज्ञापन के मुताबिक कुछ छात्राएं पिछले करीब पांच वर्षों से छात्रावास में निवासरत हैं। परिषद का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें छात्रावास से निकाले जाने की बात कही जा रही है। परिषद ने प्रशासन के समक्ष छात्राओं की स्थिति रखते हुए कहा है कि नर्सिंग पाठ्यक्रम एवं परीक्षा में देरी छात्राओं की किसी व्यक्तिगत गलती के कारण नहीं हुई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि परीक्षा पूर्ण होने से पहले छात्राओं को छात्रावास से बाहर किया जाता है, तो उनके सामने पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा की तैयारी करने की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। परिषद के अनुसार अधिकांश छात्राएं दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों से बुरहानपुर में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आई हैं। ऐसे में अचानक आवास की व्यवस्था बदलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, छात्रावास की व्यवस्था, प्रवेश की अवधि, छात्राओं के रहने की पात्रता और उन्हें छात्रावास खाली करने के संबंध में प्रशासन अथवा संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत आदेश सार्वजनिक रूप से सामने आया है या नहीं, यह अलग से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। इसलिए मामले में सभी पक्षों का पक्ष जानना महत्वपूर्ण होगा।
परीक्षा तक छात्रावास में रहने देने की मांग
अभाविप नगर मंत्री पियूष खैरे द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में कलेक्टर से आग्रह किया गया है कि छात्राओं की नर्सिंग परीक्षा आयोजित होने और पूर्ण होने तक उन्हें छात्रावास से बाहर नहीं किया जाए। परिषद ने कहा है कि छात्राओं के हित और भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन मामले में उचित निर्णय ले।
ज्ञापन में यह तर्क रखा गया है कि शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से बुरहानपुर आई छात्राओं के लिए रहने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। यदि परीक्षा के समय उनके सामने आवास की समस्या आती है तो इसका असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ सकता है। परिषद ने प्रशासन से आग्रह किया है कि छात्राओं की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए और नियमों के अनुरूप ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे छात्राओं की शिक्षा बाधित न हो और छात्रावास की प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
नियमों के अनुसार समाधान की जरूरत छात्रावास सरकारी व्यवस्था का हिस्सा होने के कारण इसमें प्रवेश, निवास अवधि, पात्रता, सीटों की उपलब्धता और छात्राओं को आवास दिए जाने से संबंधित नियम लागू होते हैं। इसलिए इस मामले में किसी भी पक्ष के हित में निर्णय लेते समय संबंधित विभाग के नियमों और सक्षम अधिकारी के आदेश को आधार बनाया जाना आवश्यक है।
यदि छात्राओं का निवास नियमों के तहत अभी वैध है और उनकी परीक्षा निकट है, तो प्रशासन उनके पक्ष को सुनकर नियमानुसार राहत देने की संभावनाओं पर विचार कर सकता है। वहीं यदि छात्रावास खाली कराने को लेकर कोई निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया या आदेश है, तो छात्राओं को उसकी जानकारी देकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ने आती हैं छात्राएं ज्ञापन में परिषद ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया है कि अधिकांश छात्राएं दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से बुरहानपुर में शिक्षा प्राप्त करने आती हैं। ऐसे में छात्रावास उनके लिए केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि शिक्षा जारी रखने में सहयोगी व्यवस्था भी है। परिषद का कहना है कि छात्राओं की नर्सिंग परीक्षा पूर्ण होने तक उन्हें छात्रावास में रहने की अनुमति देने से उनकी पढ़ाई में अनावश्यक व्यवधान से बचा जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्रशासनिक अधिकारी द्वारा लागू नियमों एवं उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर लिया जाना है।
कलेक्टर से जांच और न्यायसंगत निर्णय की अपेक्षा
अभाविप ने ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर छात्राओं के हित में उचित निर्णय लेने की मांग की है। परिषद ने कहा है कि छात्राओं की नर्सिंग परीक्षा आयोजित होने और पूर्ण होने तक उन्हें छात्रावास से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
अब इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित छात्रावास प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन यदि छात्राओं की शिकायत एवं ज्ञापन पर जांच करता है तो छात्रावास के रिकॉर्ड, छात्राओं की प्रवेश स्थिति, नर्सिंग पाठ्यक्रम की स्थिति, परीक्षा कार्यक्रम तथा छात्रावास से संबंधित नियमों की जानकारी लेकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
मामले में प्रशासन की ओर से यदि कोई निर्णय लिया जाता है तो वह संबंधित नियमों और छात्राओं की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर होना अपेक्षित है। इससे एक ओर छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होने से बच सकती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी छात्रावास की व्यवस्थाएं भी नियमानुसार संचालित की जा सकेंगी।
फिलहाल अभाविप की मांग जिला प्रशासन के समक्ष पहुंच चुकी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग छात्राओं की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और नर्सिंग परीक्षा तक उनके छात्रावास में रहने को लेकर नियमों के दायरे में क्या व्यवस्था की जाती है।





