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दक्षिण वन मंडल के जंगलों में सागौन कटाई का सिलसिला जारी ,विभागीय निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

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खबरवाणी

दक्षिण वन मंडल के जंगलों में सागौन कटाई का सिलसिला जारी ,विभागीय निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

संवाददाता प्रदीप यादव भीमपुर 

रंभा के झागरीपानी और इमलीपानी के बीच जंगल में दो तीन सागौन पेड़ कटने की सूचना, बीट गार्ड ने लकड़ी कब्जे में लेकर सुपुर्दनामा किया

 

भीमपुर। दक्षिण वन मंडल क्षेत्र के जंगलों में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई पर पूर्णतः अंकुश नहीं लग पाने को लेकर एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब रंभा क्षेत्र के झागरीपानी और इमलीपानी के जंगल में बीती रात करीब दो,तीन सागौन के पेड़ काटे जाने की जानकारी सामने आ रही है। मौके पर कटे हुए सागौन के पेड़ मिलने के बाद वन विभाग के बीट गार्ड द्वारा कटे हुए सागौन को खेत मालिक क़े कब्जे में सुपुर्दनामा सौंपे जाने की जानकारी सामने आ रही है।

 

हालांकि, वन विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र राजस्व भूमि के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद विभाग द्वारा मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि क्षेत्र राजस्व भूमि में आता है, तो वन संपदा से जुड़े सागौन के पेड़ों की कटाई की जांच और जिम्मेदारी किस विभाग की होगी तथा अवैध कटाई करने वालों तक पहुंचने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी।

 

*हर सप्ताह सामने आ रहे अवैध कटाई के मामले*

 

दक्षिण वन मंडल क्षेत्र में पिछले कुछ समय से अलग-अलग बीट और सर्किल में सागौन के पेड़ों की कटाई की शिकायतें सामने आती रही हैं। फिर भी इसमें कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद बड़े स्तर पर तस्करों तक पहुंचकर कार्रवाई नहीं होने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।

 

पूर्व में ताप्ती रेंज के कोटमी बीट अंतर्गत डोकिया जंगल में पांच सागौन के पेड़ काटे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद चांदू सर्किल क्षेत्र में भी सागौन के पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया। वहीं मुंहपानी बीट क्षेत्र में भी पांच सागौन के पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने आई थी। अब रंभा क्षेत्र में तीन सागौन के पेड़ कटने की सूचना ने एक बार फिर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

*सिर्फ गश्ती और नालियां खुदवाने से नहीं रुकेगी अवैध कटाई?*

 

जंगलों में अवैध कटाई रोकने के लिए वन विभाग द्वारा गश्ती सहित विभिन्न निगरानी गतिविधियां संचालित किए जाने की बात कही जाती है। लेकिन लगातार अलग-अलग स्थानों पर सागौन के पेड़ कटने की घटनाएं सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों की गश्ती से ही जंगलों में अवैध कटाई पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है?

 

जानकारों का कहना है कि जंगलों में सागौन के पेड़ आसानी से नहीं कटते। पेड़ काटने, उसे जंगल से बाहर निकालने और परिवहन करने के लिए कई स्तर की गतिविधियां होती हैं। ऐसे में विभाग को केवल कटे हुए पेड़ बरामद करने तक सीमित रहने के बजाय यह पता लगाने की जरूरत है कि कटाई के पीछे कौन लोग हैं और लकड़ी को कहां ले जाया जा रहा है।

 

*बड़े अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर सत्यापन क्यों नहीं*

 

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रत्येक घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा घटनास्थल का स्वयं निरीक्षण किया जा रहा है? क्या जंगल में संयुक्त रूप से भ्रमण और निगरानी की जा रही है? क्या पूर्व में सामने आए मामलों में कटाई करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई?

 

स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि रेंज स्तर से ऊपर के अधिकारी संबंधित स्थानों पर स्वयं पहुंचकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करें। मौके का निरीक्षण होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ कहां और किस परिस्थिति में काटे गए, संबंधित भूमि का वास्तविक राजस्व एवं वन अभिलेखों में क्या दर्जा है और घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है।

 

*वन संपदा को हो रहा नुकसान*

 

सागौन मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण वन संपदा में शामिल है। लगातार अवैध कटाई की घटनाएं सामने आना केवल कुछ पेड़ों के नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि इससे जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ता है।

 

यदि एक ही वन मंडल क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर लगातार पेड़ों की कटाई की घटनाएं सामने आती हैं, तो विभाग को अपनी निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है। जंगलों में संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त निगरानी, नियमित वरिष्ठ अधिकारियों का भ्रमण तथा संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

 

*अब चुनिंदा टीम बनाकर कार्रवाई की जरूरत*

 

लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच वन विभाग को अब संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी टीम गठित करने की आवश्यकता है। टीम में अनुभवी वनकर्मियों को शामिल कर नियमित पेट्रोलिंग के साथ-साथ पूर्व में कटाई वाले स्थानों की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

 

इसके अलावा विभाग को यह भी जांचना चाहिए कि पूर्व में सामने आए मामलों में क्या कार्रवाई हुई, कितने प्रकरण दर्ज किए गए, कितने आरोपियों की पहचान हुई और अवैध रूप से काटी गई सागौन की लकड़ी कहां से बरामद हुई।

 

*बड़ा सवाल : आखिर कब होगी प्रभावी कार्रवाई?*

 

रंभा क्षेत्र में तीन सागौन पेड़ों की कटाई की सूचना सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला भी केवल कटे हुए पेड़ों की जब्ती और कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा या अवैध कटाई करने वालों तक पहुंचकर ठोस कार्रवाई होगी?

 

वन विभाग के बड़े अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए और संबंधित रेंज अधिकारियों से पूरी जानकारी लेकर मामले की समीक्षा करनी चाहिए। यदि लगातार हो रही घटनाओं के पीछे किसी संगठित गिरोह या तस्करी की गतिविधि सामने आती है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई आवश्यक होगी।

 

अब निगाह इस बात पर है कि डोक्या,चांदू रंभा क्षेत्र में सामने आई सागौन कटाई की घटना की जांच किस स्तर तक पहुंचती है और विभाग जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करता है।

 

इस संबंध में वन विभाग क़े भैंसदेही रेंज आफिसर ज्योत्स्ना बूढ़ेकार ने कहा दो पेड़ कटे है स्टॉप भेजी थी उसका पूरा पंचानामा बनाया गया है रात को रात्रि गश्ती पूरी रही है फिर हमने एक गाडी भी पकड़ी रात्रि गश्ती कंटिन्यू चल रही है मेरी,कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ अपराधिक घटना हो रही तो उसे तत्काल संज्ञान में लेकर हम मामला प्रकरण बनाकर पंजीबद्द कर रहे हैं

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