खबरवाणी
शिकायत के बाद अब थाने पहुंचे ग्रामीण, बोले-हमें झूठे प्रकरणों में फंसाने और धमकाने की कोशिश
कलेक्टर-विधायक से शिकायत के बाद बीजादेही थाने में दिया आवेदन, सरपंच पर धमकी देने और जान का खतरा होने का लगाया आरोप
शाहपुर । ग्राम पंचायत तारा में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। पंचायत के निर्माण कार्यों की जांच की मांग को लेकर पहले विधायक और जिला कलेक्टर को शिकायत करने वाले ग्रामीण अब सुरक्षा की मांग लेकर बीजादेही थाने पहुंच गए हैं। गुरुवार को उपसरपंच सुभाष इवने सहित अन्य ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर आरोप लगाया कि शिकायत के बाद उन्हें धमकाया जा रहा है और उनके विरुद्ध झूठे प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया जा सकता है। आवेदन में उपसरपंच सुभाष इवने, गुलाब धुर्वे, दीपक बट्टी, महेश बट्टी, भैयालाल मरकाम, शिवजीलाल बट्टी, प्रहलाद धुर्वे एवं चितरंजन इवने ने उल्लेख किया है कि उन्होंने 21 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत तारा में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग की शिकायत जिला कलेक्टर एवं क्षेत्रीय विधायक से की थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बाद उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। आवेदन में कहा गया है कि सरपंच द्वारा उन पर दस्तावेज फाड़ने, गाली-गलौज और मारपीट जैसे आरोप लगाए गए, जबकि ग्रामीण इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम कर शिकायत को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उपसरपंच सुभाष इवने को फोन पर धमकी दी गई।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें कहा गया कि चार दिन में देख लेना क्या हाल होता है। ग्रामीणों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व में भी उनके विरुद्ध झूठी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। इसी कारण उन्हें आशंका है कि इस बार भी उन्हें झूठे प्रकरणों में फंसाने का प्रयास किया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्होंने पंचायत में कथित अनियमितताओं के संबंध में आवाज उठाई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि शिकायतकर्ताओं को डराने या दबाव में लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से पहले आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। अब इस पूरे मामले में नजर पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। एक ओर पंचायत के निर्माण कार्यों की जांच की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता खुद को असुरक्षित बताकर पुलिस की शरण में पहुंच गए हैं। ऐसे में यह मामला अब केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच का भी विषय बन गया है।





