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साईंखेड़ा की जल धरोहर पर संकट: गायत्री परिवार ने चलाया सफाई अभियान, तालाब बचाने की उठी मांग
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ग्राम साईंखेड़ा में सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक तालाब की बिगड़ती स्थिति को लेकर अब सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। जल संरक्षण और स्वच्छता के उद्देश्य से गायत्री परिवार द्वारा लगातार पुनीत कार्य करते हुए तालाब परिसर में सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
इस दौरान श्री कृष्ण लीला फाउंडेशन के संयोजक राजेंद्र उपाध्याय तथा पर्यावरण प्रेमी सदाराम झरबड़े ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब के आसपास फैले अतिक्रमण और गंदगी को तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि कई लोग तालाब के किनारे खुले में शौच कर रहे हैं, जिससे जल स्रोत प्रदूषित हो रहा है।
बताया गया कि तालाब के घाट अत्यधिक जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं और चारों ओर गंदगी फैली हुई है। कुछ लोग तालाब के पास मवेशी बांध रहे हैं तथा गोबर और खाद भी वहीं इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे जल स्रोत की स्वच्छता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
ग्राम साईंखेड़ा के बुजुर्ग बाबूराव मकोड़े, रामप्रसाद सेंदरे पांडुरंग देशमुख, आर.के. बनखेड़े एवं मधुकर मकोड़े ने बताया कि यह तालाब सैकड़ों वर्षों पुरानी जल धरोहर है, जिसे इस तरह बर्बाद होने देना बेहद चिंताजनक है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्राम पंचायत को जिम्मेदार ठहराते हुए मांग की है कि तालाब के पत्थर से बने घाटों की नियमित सफाई कर उन्हें आम लोगों के उपयोग के लिए सुरक्षित और स्वच्छ बनाया जाए।
साईंखेड़ा की इस ऐतिहासिक जल धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन और ग्राम पंचायत को शीघ्र ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य जल स्रोत सुरक्षित रह सके।






