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आमला। खेडलीबाज़ार में शराब दुकान के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा: ‘साहब, बेटियों का घर से निकलना दूभर हो गया है‘
आबादी के बीच संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग, जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन
आमला। ग्रामीण क्षेत्रों में रिहायशी इलाकों के बीच संचालित शराब की दुकानें अब महिलाओं और छात्राओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। ताजा मामला आमला विकासखंड के ग्राम खेडलीबाज़ार का है, जहाँ मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। महिलाओं का कहना है कि गाँव के बीचों-बीच स्थित शराब दुकान के कारण अब बेटियों का स्कूल जाना और महिलाओं का घर से निकलना भी असुरक्षित हो गया है।
चारों तरफ स्कूल-अस्पताल, बीच में जाम का अड्डा
ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में बताया कि शराब दुकान जिस स्थान पर स्थित है, उसके ठीक चारों तरफ संवेदनशील सार्वजनिक केंद्र हैं। यहाँ पास ही में सरकारी अस्पताल, सेवा सहकारी समिति, शासकीय स्कूल और घना रहवासी क्षेत्र है। दिन भर यहाँ शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। नशे में धुत लोग अक्सर आपस में गाली-गलौज और मारपीट करते हैं, जिसका सीधा असर वहाँ से गुजरने वाली स्कूली छात्राओं और राशन दुकान पर आने वाली महिलाओं पर पड़ता है।
छेड़छाड़ की आशंका से डरी हैं छात्राएं
महिलाओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि दुकान के पास हर वक्त खड़े रहने वाले असामाजिक तत्वों के कारण छात्राओं के साथ अप्रिय घटना होने की संभावना बनी रहती है। छात्राएं डर के साये में स्कूल जाने को मजबूर हैं। गाँव की एक महिला ने बताया, “गाली-गलौज और फब्तियां कसना यहाँ आम बात हो गई है। हमारी सुनवाई अब तक क्यों नहीं हुई?”
प्रशासन को अल्टीमेटम: पहले भी दिए जा चुके हैं आवेदन
खेडलीबाज़ार की ग्राम सभा ने 1 अप्रैल 2026 को ही दुकान हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था। इसके अलावा 11 मार्च को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और 21 अप्रैल को कलेक्टर बैतूल को भी लिखित शिकायत दी गई थी। अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। महिलाओं ने दोटूक कहा है कि यदि इस बार भी दुकान का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम के लिए बाध्य होंगी।





