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आस्था, परंपरा और उत्सव का संगम: 50 वर्षों से सजी मां विजासन माई की चौकी, आज से मेला शुरू

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खबरवाणी

आस्था, परंपरा और उत्सव का संगम: 50 वर्षों से सजी मां विजासन माई की चौकी, आज से मेला शुरू

भौंरा । चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्र की आस्था का केंद्र मां विजासन देवी मंदिर एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर होने जा रहा है। करीब पांच दशक से अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा मां विजासन माई मेला इस वर्ष 23 मार्च सोमवार से प्रारंभ होकर 29 मार्च रविवार तक आयोजित किया जाएगा। वर्षों पुरानी यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण बन चुकी है। मंदिर से जुड़ी लोक मान्यताओं के चलते नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां विजासन देवी के प्रति गहरी आस्था के कारण प्रतिवर्ष इस अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है, जो समय के साथ और अधिक व्यापक स्वरूप लेता गया है। मेला समिति के अध्यक्ष सुधीर नायक एवं उपाध्यक्ष जय किशोर मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष आयोजन को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिससे मेले में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मेले के अंतर्गत सप्ताहभर विविध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। 24 मार्च को क्षेत्रीय स्तर की बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें ग्रामीण अंचल के प्रतिभागी अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके पश्चात 25 एवं 26 मार्च को दो दिवसीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर रहेगी। प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए ₹11001 से लेकर ₹901 तक के आकर्षक पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं।
28 मार्च शनिवार को प्रातःकालीन बेला में रामसत्ता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न मंडलियों द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए जाएंगे। इसी दिन बड़े बजरंग मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जहां हजारों श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करेंगे।
मेले का समापन 29 मार्च को सांस्कृतिक आयोजनों के साथ होगा, जिसमें शिवम इवेंट ग्रुप द्वारा म्यूजिकल नाइट का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भजन, गीत-संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। करीब 50 वर्षों से अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा यह मेला समय के साथ अपनी भव्यता और लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि करता गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इसमें पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, झूले और बाजार भी शामिल हो चुके हैं, जो इसे क्षेत्र का प्रमुख वार्षिक उत्सव बनाते हैं।
अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि यह मेला क्षेत्र की आस्था और एकता का प्रतीक है, जिसे सफल बनाने में सभी का सहयोग आवश्यक है। वहीं उपाध्यक्ष जयकिशोर मिश्रा ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने एवं व्यवस्थाओं में सहयोग करने की अपील की है।

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