भारत और जर्मनी की दोस्ती ने 25 साल पूरे कर लिए हैं और इसी मौके पर जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दौरे पर आ रहे हैं। यह उनका पहला भारत दौरा है और इस यात्रा को कूटनीति और रक्षा दोनों नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। खास चर्चा इस बात की है कि क्या इस मुलाकात के दौरान भारत और जर्मनी के बीच एक बड़ी पनडुब्बी डील फाइनल हो सकती है।
भारत जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार
पीएम नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मुलाकात अहमदाबाद में होगी। इसके बाद दोनों नेता साबरमती आश्रम जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी शामिल होंगे। इसके साथ ही महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय वार्ता होगी, जहां राजनीतिक सहयोग, रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह दौरा भारत जर्मनी रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
क्यों खास है 8 अरब डॉलर की पनडुब्बी डील
भारत और जर्मनी के बीच जिस पनडुब्बी समझौते की चर्चा हो रही है, वह अब अंतिम चरण में बताया जा रहा है। अगर यह डील होती है तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार जर्मनी भारत को पनडुब्बी बनाने की आधुनिक तकनीक देगा। इससे मेक इन इंडिया को भी जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
भारतीय नौसेना को कैसे होगा फायदा
फिलहाल भारतीय नौसेना के पास कुछ पुरानी रूसी पनडुब्बियां और कुछ फ्रांस से ली गई नई पनडुब्बियां हैं। जर्मनी के साथ डील होने पर भारत फ्रांस से तीन नई पनडुब्बियां नहीं खरीदेगा। नई जर्मन पनडुब्बियां ज्यादा आधुनिक होंगी और समुद्र के अंदर लंबे समय तक रहने में सक्षम होंगी, जिससे भारत की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
क्या होगी इन पनडुब्बियों की खासियत
जानकारी के मुताबिक इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम होगा। इस तकनीक की मदद से पनडुब्बी बिना सतह पर आए लंबे समय तक समुद्र के भीतर रह सकती है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता और सुरक्षा काफी मजबूत होगी। यह तकनीक भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
Read Also:Suzuki e-Access Electric Scooter: सुजुकी का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च
रूस पर निर्भरता घटाने की भारत की कोशिश
दुनिया की रिपोर्टों के मुताबिक भारत अभी भी सैन्य उपकरणों का बड़ा आयातक है और लंबे समय से रूस पर उसकी निर्भरता रही है। जर्मनी के साथ यह समझौता भारत की उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह रक्षा क्षेत्र में विकल्प बढ़ाना चाहता है। पीएम मोदी और जर्मन चांसलर की यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और भविष्य की रणनीति से जुड़ा बड़ा कदम मानी जा रही है।





