जम्मू-कश्मीर के युवाओं को भटकाने के लिए पाकिस्तानी आतंकी संगठन फिर से नई चालें चल रहे हैं। पहले ये संगठन मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए युवाओं को अपने जाल में फँसाते थे, लेकिन अब उन्होंने इसे और हाई-टेक बना दिया है। नई जानकारी के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा ने एक विशेष IT सेल तैयार किया है, जिसका एक्सक्लूसिव वीडियो सामने आया है।
युवाओं को तेजी से रेडिकलाइज करने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ये आतंकी संगठन युवाओं की सोच में ज़हर भरने की कोशिश में लगे हैं। सोशल मीडिया पर नफ़रत, कट्टरपंथ और हिंसा से भरा कंटेंट भेजकर उन्हें मानसिक रूप से गुमराह किया जा रहा है। उनकी कोशिश है कि युवाओं को धीरे-धीरे अपनी विचारधारा की तरफ खींचा जाए।
80 कंप्यूटर वाला हाई-टेक IT सेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लश्कर-ए-तैयबा ने करीब 80 कंप्यूटरों का एक बड़ा IT सेल बनाया है। ये विकास नहीं बल्कि आतंकवाद की डिजिटल तैयारी है।
यह सेल फेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाता है, युवाओं को टारगेट करता है और व्हाट्सऐप-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सामग्री भेजकर उन्हें अपनी सोच में फँसाता है।
यानी अब बंदूकें ऑफ़लाइन और कट्टरपंथ ऑनलाइन—दोनों ओर से हमला।
सैफुल्लाह कसूरी का नाम फिर सामने
लश्कर-ए-तैयबा के नंबर-2 आतंकी और पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का नाम भी इस साजिश में सामने आया है।कसूरी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने की कोशिश कर रहा है और भारत को कई बार धमकी भी दे चुका है।90 के दशक में भी यही संगठन राजौरी, पुंछ और डोडा-किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी इलाकों के युवाओं को सीमा पार भेजकर पहले OGW और फिर आतंकी बनाता था।अब सोशल मीडिया की वजह से ये काम उनके लिए और आसान हो गया है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता बन चुका है।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी चेतावनी
एजेंसियों ने साफ कहा है कि डिजिटल रेडिकलाइजेशन आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
विभिन्न टीमें लगातार इन ऑनलाइन नेटवर्क को ट्रैक कर रही हैं, उनकी लोकेशन पता लगा रही हैं और उनके ऑपरेशन को रोकने की कोशिश कर रही हैं।
युवाओं को सोशल मीडिया पर सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक या संदेश से बचने की सलाह दी गई है।





