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₹4 करोड़ के छात्रावास निर्माण में मजदूरों की जान से खिलवाड़

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खबरवाणी

₹4 करोड़ के छात्रावास निर्माण में मजदूरों की जान से खिलवाड़

बारिश के बीच खुले बिजली के तारों के बीच जारी निर्माण कार्य, सुरक्षा इंतजाम नदारद; ठेकेदार और पीआईयू की निगरानी पर गंभीर सवाल

भौंरा । संदीपनी विद्यालय शाहपुर परिसर में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से 100 सीटर छात्रावास का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण कार्य का ठेका भोपाल की राधे-राधे कंस्ट्रक्शन को दिया गया है, जबकि इसकी निगरानी पीआईयू द्वारा की जा रही है। लेकिन मौके पर दिखाई दे रही स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या निर्माण एजेंसी और विभाग के लिए मजदूरों की सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती?
स्थल निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर कई स्थानों पर बिजली के खुले तार पड़े मिले। लगातार बारिश के बीच इन्हीं तारों के आसपास मजदूर काम करते नजर आए, जबकि उन्हें बिजली के खतरे से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम दिखाई नहीं दिए। निर्माण स्थल पर न तो विद्युत सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध नजर आए और न ही ऐसी व्यवस्था, जिससे किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। बारिश के मौसम में खुले बिजली के तार किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि किसी मजदूर की करंट लगने से जान चली जाती है या वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी ठेकेदार की पीआईयू की या संबंधित विभाग की?

सुरक्षा नियमों की अनदेखी?

भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्त) अधिनियम, 1996 तथा निर्माण कार्यों से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों के अनुसार निर्माण स्थल पर कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ठेकेदार की कानूनी जिम्मेदारी है। वहीं विद्युत सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के तहत खुले तारों को सुरक्षित रखना, विद्युत आपूर्ति की सुरक्षित व्यवस्था करना तथा दुर्घटना से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करना अनिवार्य माना गया है। यदि इन प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि श्रमिकों की जान को जोखिम में डालने जैसा है।

निगरानी कर रही पीआईयू पर भी सवाल

निर्माण कार्य की निगरानी पीआईयू कर रही है। इसके बावजूद यदि निर्माण स्थल पर खुले बिजली के तार और सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां मौजूद हैं तो विभागीय निगरानी की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना लाजिमी है। क्या अधिकारियों ने नियमित निरीक्षण किया? यदि किया तो ऐसी स्थिति को नजरअंदाज क्यों किया गया?

दुर्घटना का इंतजार क्यों?

हर वर्ष निर्माण स्थलों पर सुरक्षा में लापरवाही के कारण कई श्रमिक हादसों का शिकार होते हैं। इसके बावजूद शाहपुर के इस सरकारी निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी चिंता का विषय है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार एजेंसियां किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागने की प्रतीक्षा कर रही हैं।

उठ रहे अहम सवाल

– बारिश के बीच खुले बिजली के तारों के आसपास मजदूरों से काम क्यों कराया जा रहा है?
– क्या ठेकेदार ने श्रमिक सुरक्षा के अनिवार्य मानकों का पालन किया?
– क्या परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) ने सुरक्षा संबंधी कमियों पर कोई कार्रवाई की?
– यदि कोई हादसा होता है तो उसकी जवाबदेही किस अधिकारी और किस एजेंसी की होगी?
– करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा को आखिर क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?

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