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जहां छंटना था कचरा, वहां भरा मिला भूसा

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खबरवाणी

जहां छंटना था कचरा, वहां भरा मिला भूसा

15वें वित्त आयोग से बना 3 लाख का सेग्रीगेशन शेड दो साल से बंद, स्वच्छता व्यवस्था कागजों तक सीमित

भौंरा। गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई सरकारी योजनाएं ग्राम पंचायत कांटावाड़ी में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। यहां 15वें वित्त आयोग की राशि से करीब 3 लाख रुपये की लागत से निर्मित सेग्रीगेशन शेड निर्माण के दो साल बाद भी अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सका। जिस भवन में गांव का गीला और सूखा कचरा अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन किया जाना था, वहां वर्तमान में पशुओं को खिलाने के लिए भूसा भरकर रखा गया है।

मौके पर दिखाई देने वाली तस्वीरें और स्थिति सरकारी दावों की हकीकत बयां करती हैं। भवन के भीतर कचरे के पृथक्करण से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई नहीं देती। न तो यहां घर-घर से एकत्रित कचरा पहुंच रहा है और न ही उसके प्रसंस्करण की कोई व्यवस्था है। इसके बजाय पूरा ढांचा भूसा भंडारण केंद्र के रूप में उपयोग में लिया जा रहा है।

गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में सेग्रीगेशन शेड बनाए गए थे, ताकि गांवों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग किया जा सके। इससे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग बढ़ाने, पर्यावरण प्रदूषण कम करने और गांवों को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है। लेकिन कांटावाड़ी में यह उद्देश्य शुरुआत से ही अधूरा नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण के बाद से आज तक यहां नियमित रूप से कचरा संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था शुरू नहीं की गई। नतीजतन लाखों रुपये की लागत से बनी यह संरचना निष्प्रयोज्य साबित हो रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब भवन का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए ही नहीं होना था, तो इसके निर्माण पर सार्वजनिक धन खर्च करने का औचित्य क्या है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में आज भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। कई स्थानों पर कचरा खुले में फेंका जाता है, जबकि कचरा प्रबंधन के लिए बनाई गई सरकारी संपत्ति भूसा रखने के काम आ रही है। इससे न केवल योजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि इसकी निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था भी कटघरे में खड़ी हो रही है। स्वच्छता के नाम पर बने इस ढांचे की वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि निर्माण कार्य तो कर दिया गया, लेकिन उसे संचालित करने और उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में यह मामला केवल एक बंद भवन का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविकता का भी प्रतीक बन गया है।

 

इनका कहना

 

सरपंच ज्योति नावडे ने कहा कि सेग्रीगेशन शेड का निर्माण पूर्ण हो चुका है, लेकिन अभी इसका संचालन शुरू नहीं हुआ है। यदि किसी ने उसमें भूसा रख दिया है, तो उसे हटवा दिया जाएगा।

 

उपयंत्री योगेश बामने ने बताया कि सेग्रीगेशन शेड का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है।

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