Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

मोक्षधाम में पानी का संकट: एक माह से खराब पड़ा हैंडपंप, अंतिम संस्कार में आने वाले लोग बूंद-बूंद पानी को तरसे

By
On:

खबरवाणी

मोक्षधाम में पानी का संकट: एक माह से खराब पड़ा हैंडपंप, अंतिम संस्कार में आने वाले लोग बूंद-बूंद पानी को तरसे

भौंरा नगर के एकमात्र मोक्षधाम में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। मोक्षधाम परिसर में स्थित एकमात्र हैंडपंप पिछले लगभग एक माह से खराब पड़ा है, जिससे अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक हैंडपंप को सुधारने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार, लगभग 10 हजार की आबादी वाले भौंरा नगर के एकमात्र मोक्षधाम में पानी की व्यवस्था पूरी तरह इसी हैंडपंप पर निर्भर है। मोक्षधाम के समीप नदी स्थित है, लेकिन गर्मी के कारण नदी में जलस्तर लगभग समाप्त हो चुका है। केवल कुछ स्थानों पर रुका हुआ पानी बचा है, जो उपयोग योग्य नहीं माना जा रहा। ऐसे में पीने, स्नान और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए हैंडपंप ही एकमात्र सहारा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हैंडपंप की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उसे लंबे समय तक चलाने के बाद भी मुश्किल से एक-दो बाल्टी पानी ही निकल पाता है। इससे अंतिम संस्कार के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

पाइपलाइन विस्तार की उठी मांग

लायंस क्लब भौंरा के सदस्य ओमप्रकाश कावड़कर ने मोक्षधाम तक पेयजल पाइपलाइन का विस्तार किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान में नगर में पीएचई विभाग द्वारा पाइपलाइन विस्तार का कार्य कराया जा रहा है, ऐसे में मोक्षधाम को भी इस योजना से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

नल-जल योजना पर उठाए सवाल

कावड़कर ने नगर की नल-जल योजना के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पाइपलाइन निर्धारित मानकों के अनुरूप गहराई पर नहीं डाली जा रही है तथा कई स्थानों पर एक मीटर से भी कम गहराई में पाइप बिछाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कार्य बिना समुचित मास्टर प्लान के किया जा रहा है और अनेक घरों में कनेक्शन तो दिए गए हैं, लेकिन टोटी एवं स्टैंड जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने फिल्टर प्लांट की क्षमता पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि यदि प्लांट की क्षमता पर्याप्त नहीं थी तो योजना का हस्तांतरण (हैंडओवर) किस आधार पर किया गया। साथ ही बोरवेल की गहराई और मोटर की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई।

करोड़ों की योजनाओं के बाद भी पानी की समस्या बरकरार

स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 1 करोड़ 69 लाख रुपये की नल-जल योजना पर खर्च होने के बावजूद नगरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और कई क्षेत्रों में लोग गंदे पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं। इसके बाद भी पीएचई विभाग द्वारा लगभग 80 लाख रुपये की लागत से पाइपलाइन विस्तार का नया कार्य कराया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से हुआ होता तो आज मोक्षधाम समेत नगर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी का संकट नहीं होता।

समाजसेवियों की मेहनत पर फिर सकता है पानी

नगर के समाजसेवी वर्षों से मोक्षधाम परिसर को विकसित करने और हरित बनाने के लिए पौधरोपण एवं अन्य सौंदर्यीकरण कार्य कर रहे हैं। लेकिन पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण लगाए गए पौधों के संरक्षण पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शीघ्र ही पेयजल व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो मोक्षधाम की व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित होंगी।

तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों ने पीएचई विभाग और प्रशासन से मांग की है कि खराब हैंडपंप को तत्काल दुरुस्त कराया जाए तथा मोक्षधाम तक पाइपलाइन विस्तार कर स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर लोगों को पानी के लिए परेशान होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है और यह स्थिति मानव संवेदनाओं को आहत करने वाली है।

इनका कहना

मोक्षधाम में लगा हैंडपंप सामान्य रूप से पर्याप्त पानी देता है। यदि उसमें कोई खराबी है तो विभाग उसकी जांच कर मरम्मत कराएगा। उन्होंने कहा कि मोक्षधाम तक नल-जल योजना की पाइपलाइन विस्तार की मांग भी मिल रही है, जिस पर विभाग विचार कर रहा है।

योगेश धुर्वे

एसडीओ पीएचई विभाग शाहपुर

For Feedback - feedback@example.com
Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News