Trump Tariff Case: पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने भारत पर 50% तक का टैरिफ (शुल्क) लगा दिया है। पहले 25% का बेस टैरिफ लगाया गया और फिर अतिरिक्त 25% जोड़कर इसे कुल 50% कर दिया गया। यह दुनिया के किसी भी देश पर लगाया गया सबसे ऊँचा टैरिफ माना जा रहा है। अमेरिका ने यह टैक्स भारत से आने वाले तेल, गैस और अन्य निर्यातित वस्तुओं पर लगाया है।
अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला – ट्रंप का कदम सही था या गलत?
इस हफ्ते अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट एक अहम फैसला सुनाने वाला है जो न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक किस्मत तय करेगा, बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालेगा। कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रंप ने कानून की सीमा से बाहर जाकर इतने ऊँचे टैरिफ लगाए थे या नहीं। अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ गया तो अमेरिका को अलग-अलग देशों से वसूले गए अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं।
भारत पर ट्रंप के आरोप – ‘रूस की मदद कर रहा है भारत’
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है, इसलिए अमेरिका को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। हालांकि, भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए इसे अनुचित और अनुचित व्यापारिक दबाव बताया था। भारत ने कहा कि उसका तेल खरीदना पूरी तरह राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा का मामला है।
अगर ट्रंप हार गए तो भारत को कितना पैसा मिल सकता है?
अगर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ आता है, तो अमेरिका को कई देशों को अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी इस फैसले से बड़ा फायदा हो सकता है। हालांकि सटीक राशि का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन भारत के निर्यात (Export) के आधार पर यह रकम अरबों डॉलर में हो सकती है।
साल 2024-25 में भारत-अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 131.84 बिलियन डॉलर का था, जिसमें भारत का निर्यात 86.51 बिलियन डॉलर और आयात 45.33 बिलियन डॉलर रहा।
70 से ज्यादा देशों पर लगे थे ट्रंप के टैरिफ, अब बढ़ी कानूनी मुश्किलें
ट्रंप प्रशासन ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि चीन, रूस, कनाडा, ताइवान और यूरोप जैसे 70 से अधिक देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए थे। अब कोर्ट में मामला ट्रंप के लिए सिरदर्द बन गया है। उन्होंने खुद कहा है कि अगर कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ गया, तो यह अमेरिका के लिए एक आर्थिक आपदा (Economic Disaster) साबित हो सकता है।





