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जख्मी सांड ने दो दिनों तक मचाया आतंक

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खबरवाणी

जख्मी सांड ने दो दिनों तक मचाया आतंक,

शोभापुर कॉलोनी में दहशतबजरंग दल व गौ रक्षकों की सूझबूझ से काबू में आया बेकाबू सांड

खबरवाणी न्यूज़ | रफीक
सारनी
नगर पालिका परिषद क्षेत्र अंतर्गत शोभापुर कॉलोनी एवं आसपास के इलाकों में बीते दो से तीन दिनों से एक जख्मी काले रंग का सांड लगातार उत्पात मचाता रहा, जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल निर्मित हो गया। सांड के शरीर पर गंभीर चोटें होने के कारण वह बेकाबू हो गया था और राह चलते लोगों, वाहन चालकों एवं राहगीरों पर हमला कर रहा था। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी चिंता बनी हुई थी कि कहीं कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त जख्मी सांड की तलाश बजरंग दल एवं गौ-रक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले तीन से चार दिनों से की जा रही थी। रविवार सुबह सांड पुनः गणेश चौक क्षेत्र में नजर आया, जहां उसने अचानक उत्पात मचाना शुरू कर दिया। सांड की आक्रामकता के चलते मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और लोग अपने घरों एवं दुकानों में दुबकने को मजबूर हो गए।
सूचना मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। इस दौरान बजरंग दल के राहुल डिंडोरी, दीपक सूर्यवंशी, नगर अध्यक्ष संदीप गावंडे, नगर मंत्री जितेंद्र प्रजापति, नगर गो-रक्षा प्रमुख आकाश, सह-प्रमुख सज्जू, निखिल धुर्वे, अंकित पवार, कौशल, सुमित, कन्हैया, अन्नू, सचिन, सुनील, दुर्गेश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर सांड को काबू में करने का प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत अत्यधिक खराब होने के कारण वह किसी के नियंत्रण में नहीं आ रहा था और बार-बार हमला करने की कोशिश कर रहा था।
काफी देर तक चले प्रयासों के बाद अचानक एक अन्य लाल रंग का सांड मौके पर पहुंच गया, जिससे दोनों सांडों के बीच भिड़ंत हो गई। इस भिड़ंत के बाद काला सांड कुछ देर के लिए शांत होकर बैठ गया। इसी अवसर का लाभ उठाते हुए गौ-रक्षकों ने साहस का परिचय देते हुए जख्मी सांड को रस्सी से बांधा और उसे प्राथमिक उपचार के तहत दवाई का इंजेक्शन लगाया गया। दवा दिए जाने के बाद सांड की हालत में कुछ सुधार आया और वह पहले की तुलना में शांत नजर आया।
इस संबंध में जब नगर पालिका के सेनेटरी इंस्पेक्टर के.के. भावसार से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि नगर क्षेत्र में फिलहाल कोई गौशाला उपलब्ध नहीं है और आसपास की गौशालाओं द्वारा पशुओं को लेने से इनकार कर दिया गया है। इसके चलते जख्मी एवं निराश्रित पशुओं के संरक्षण में परेशानी आ रही है।
घटना के बाद गौ-रक्षकों एवं क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर क्षेत्र में खुले में घूम रहे भारी-भरकम सांडों एवं निराश्रित पशुओं को सुरक्षित स्थानों अथवा गौशालाओं में पहुंचाने की ठोस व्यवस्था की जाए। नागरिकों का कहना है कि खुले सांड आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिससे वाहन चालकों, आम लोगों और बच्चों की जान को खतरा बना हुआ है। साथ ही पशु मालिकों से भी अपील की गई है कि वे अपने मवेशियों को खुले में न छोड़ें, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

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