HometrendingSystem Ki Laparwahi : सिस्टम की लापरवाही बनी दिव्यांग महिला की परेशानी

System Ki Laparwahi : सिस्टम की लापरवाही बनी दिव्यांग महिला की परेशानी

जनसुनवाई से लेकर जनपद तक भटकते रही बुआ-भतीजी, बुआ को गोद में उठाकर पैदल ही छानते रही दफ्तरों की खाक

बैतूल – System Ki Laparwahi – सिस्टम की लापरवाही एक दिव्यांग महिला के लिए किस कदर परेशानी का सबब बनी यह सभी ने मंगलवार को अपनी आंखों से देखा। दरअसल एक किशोरी अपनी दिव्यांग बुआ को गोद में लेकर इस उम्मीद में जनसुनवाई में पहुंची थी कि उसकी दिव्यांग पेंशन स्वीकृत हो जाएगी और उसे ट्राईसिकल मिल जाएगी लेकिन लालफीताशाही के चलते दोनों में से कुछ भी नहीं मिला। यदि कुछ मिला तो अगले महीने आने का आश्वासन। मजबूरी में दिव्यांग को बैरंग घर जाने मजबूर होना पड़ा।

एक ट्राईसिकल तक नहीं दे सका प्रशासन

प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसार दुर्गा कासदे उम्र 22 वर्ष निवासी कोलगांव लगभग 1 साल से दिव्यांग पेंशन और ट्राईसाइकिल के लिए परेशान हो रहे हैं अपने ही गांव में सरपंच सचिव से भी कई बार मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराया है परंतु किसी भी प्रकार की कोई सहायता अभी तक के प्राप्त नहीं हुई है जिससे दिव्यांग महिला को अपनी भतीजी काजल कासदे उम्र 14 वर्ष के गोद का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन प्रशासन दिव्यांग पेंशन स्वीकृत करना तो दूर एक ट्राईसिकल तक नहीं दे सका।

कलेक्टर ने भी जनपद जाने सुना दिया फरमान

वही आज अपनी समस्या को लेकर अपनी भतीजी के साथ दिव्यांग महिला दुर्गा जनसुनवाई में पहुंची और कलेक्टर को अपनी सारी समस्याओं से अवगत कराया जिसके बाद कलेक्टर ने तत्काल जनपद पंचायत को महिला की समस्याओं का निराकरण करने के लिए निर्देशित किया गया। इसके बाद काजल अपनी बुआ को गोद में लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय से जनपद पंचायत पहुंची और वहां पर अधिकारियों से चर्चा की और अपनी समस्याओं से अधिकारी को अवगत कराया।

एक महीने बाद आने का दे दिया हवाला

इसके बाद महिला का फॉर्म भर कर अगले महीने आने के लिए फिर से कहा गया है परंतु फिलहाल किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकल पाया जिसके बाद 14 साल की भतीजी अपनी बुआ को गोद में उठाकर वापसी हताश होकर बस से अपने घर चले गए। ये मामला इस बात का भी प्रमाण है कि प्रदेश और केंद्र सरकार लगातार ज़रूरतमन्दों तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए निर्देश जारी करती है लेकिन लापरवाह नौकरशाही के चलते आज भी दुर्गा जैसे जरूरतमंद दफ्तरों के चक्कर काटकर बैरंग वापस लौट रहे हैं ।

RELATED ARTICLES

Most Popular