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Statehood: केंद्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने पर बनी सहमति

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संसद के शीतकालीन सत्र में  लाया जाएगा प्रस्ताव 

Statehood: केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने पर सहमति जता दी है, जबकि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश ही बना रहेगा। नवंबर के अंत में शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस फैसले को लेकर प्रस्ताव पेश किया जाएगा।जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जहां उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने का अनुरोध किया था। उन्हें इस वर्ष के अंत तक राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन मिला था।2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया था, लेकिन सरकार ने हालात सामान्य होने पर राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था।जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत राज्य का पुनर्गठन किया गया था, और अब पुनः राज्य का दर्जा देने के लिए संसद से इस अधिनियम में संशोधन करना होगा। यह बदलाव संविधान की धारा 3 और 4 के तहत किए जाएंगे और इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी आवश्यक होगी। संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिल जाएगा।

राज्य का दर्जा मिलने के बाद बदलाव:

पुलिस और कानून-व्यवस्था – ये राज्य सरकार के अधीन होंगे।भूमि और राजस्व मामलों पर कानून – राज्य सरकार को अधिकार होंगे।राज्यपाल का हस्तक्षेप समाप्त – सरकार चलाने में राज्यपाल का दखल नहीं होगा।वित्तीय स्वतंत्रता – केंद्र पर निर्भरता कम होगी, और वित्त आयोग से सहायता मिलेगी।कानून बनाने का अधिकार – सार्वजनिक व्यवस्था और समवर्ती सूची के मामलों पर विधानसभा को अधिकार मिलेगा।वित्तीय विधेयक की मंजूरी – राज्यपाल की अनुमति के बिना वित्तीय विधेयक पेश किए जा सकेंगे।एंटी करप्शन ब्यूरो और सेवाओं पर राज्य का नियंत्रण – अधिकारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर पर राज्य सरकार का नियंत्रण होगा।वाणिज्य और व्यापार के अधिकार – व्यापार, टैक्स और अन्य वाणिज्य मामलों में राज्य सरकार को पूर्ण अधिकार होंगे।मंत्रियों की संख्या में वृद्धि – केंद्र शासित प्रदेश के बजाय अब राज्य के रूप में मंत्रियों की संख्या बढ़ेगी।इस बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर को राज्य सरकार के अधीन अधिक स्वायत्तता और अधिकार मिलेंगे, जिससे उसे अपने स्थानीय प्रशासनिक और आर्थिक मामलों में स्वतंत्रता प्राप्त होगी।4o

 source internet साभार…

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