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सारनी पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फँसे 64 वर्षीय बुजुर्ग को बचाया, 73 लाख की ठगी टली
खबरवाणी न्यूज़ शेख रफीक सारनी।
पुलिस ने बड़ी तत्परता दिखाते हुए एक 64 वर्षीय रिटायर्ड WCL कर्मचारी को साइबर ठगों द्वारा रचित “डिजिटल अरेस्ट” के जाल से मुक्त कर गंभीर आर्थिक नुकसान से बचा लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से करीब 73 लाख रुपये की ठगी होने से बच गई।
जानकारी के अनुसार भोपाल निवासी चैतराम नरवरे (64) को ठगों ने वीडियो कॉल पर स्वयं को ईडी व सीबीआई अधिकारी बताकर गलत लेन–देन के झूठे आरोपों में फँसाने का प्रयास किया। ठगों ने उन्हें सामाजिक बदनामी का भय दिखाकर पाथाखेड़ा बुला लिया और एक होटल में ठहरा कर तीन दिन से “डिजिटल कैद” जैसी स्थिति में रखा। उनसे परिवार व परिचितों से संपर्क भी बंद करवा दिया गया था।
ठगों के दबाव में पीड़ित अपने SBI खाते में जमा एफडी को तोड़कर राशि देने के लिए बैंक से RTGS फॉर्म तक लेकर आ चुके थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि राजेश गेस्ट हाउस, बगडोना में एक व्यक्ति साइबर ठगों के दबाव में है।
सूचना पर चौकी पाथाखेड़ा प्रभारी उप निरीक्षक मनोज कुमार उइके एवं टीम तुरंत होटल पहुँची और पीड़ित को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने पीड़ित से विस्तृत जानकारी लेकर उनके परिवारजनों से संपर्क करवाया। मामले में थाना प्रभारी बैतूल बाजार निरीक्षक अंजना धुर्वे, प्रधान आरक्षक ज्ञानसिंह तेकाम, आरक्षक रविमोहन, राकेश करपे तथा सैनिक सुभाष सहित साइबर पुलिस बैतूल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार यदि समय पर कार्रवाई न होती तो ठग पीड़ित की जीवनभर की कमाई हड़प लेते।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं — SP बैतूल
पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेंद्र जैन ने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया भारतीय कानून में नहीं है। कोई भी एजेंसी—पुलिस, सीबीआई, ईडी—वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से न तो किसी को गिरफ्तार कर सकती है और न ही धनराशि की मांग कर सकती है।





