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sahayak ayukt – आयुक्त पर भारी सहायक आयुक्त

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क्रीड़ा परिसर मामले में निर्देशों की अवहेलना

sahayak ayuktबैतूल आदिवासी विकास विभाग में उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना का मामला सामने आया है। दो साल पहले हुए आदेश का आज तक परिपालन नहीं हो पाया है। जिससे लगता है कि आयुक्त पर बैतूल आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भारी पड़ रही हैं। दो साल पहले आयुक्त ने प्रदेश के 13 जिले के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर क्रीड़ा परिसर में खेल शिक्षकों (पीटीआई) को अधीक्षक बनाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ और बैतूल जिले के दोनों क्रीड़ा परिसर में प्राथमिक शिक्षक अधीक्षकों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

जिले में हैं दो क्रीड़ा परिसर

आदिवासी बाहुल्य जिले के गरीब बच्चों को खेलकूद की विधाओं में पारंगत करने के लिए शासन द्वारा क्रीड़ा परिसर तो खोल दिए गए हैं लेकिन क्रीड़ा परिसरों में पीटीआई अधीक्षक की नियुक्ति करने के बजाए प्राथमिक शिक्षक जैसे गैर अनुभवी शिक्षकों को अधीक्षक बनाकर रखा गया है। जिले के दोनों क्रीड़ा परिसर में यही स्थिति है। जिले में आदिवासी कन्या क्रीड़ा परिसर हमला और आदिवासी बालक क्रीड़ा परिसर शाहपुर में स्थित हैं। बैतूल में प्राथमिक शिक्षक श्रीमती अनिता जौंधलेकर और शाहपुर में प्राथमिक शिक्षक शिवप्रसाद बामने अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं।

आयुक्त ने इसलिए किए थे आदेश | sahayak ayukt

आदिवासी विकास विभाग मध्यप्रदेश के आयुक्त ने 9 फरवरी 2021 को बालाघाट, मंडला, बडवानी, अनूपपुर, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, धार, खंडवा, बैतूल, सीधी, सिवनी, रतलाम और डिंडौरी के सहायक आयुक्त को पत्र लिखा था कि क्रीड़ा परिसरों में वरिष्ठ पीटीआई को अधीक्षक का प्रभार दिया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह चेतावनी दी गई थी कि पहले जो पत्र लिख गए थे उन निर्देशों का पालन जिले में नहीं किया जा रहा है जो उचित नहीं है। अत: जिन क्रीड़ा परिसर में नॉन पीटीआई अधीक्षक कार्यरत हैं उन्हें उनकी मूल संस्थान में कार्यमुक्त कर निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। आयुक्त ने यह निर्देश इस मंशा से दिए थे कि यदि पीटीआई क्रीड़ा परिसर के अधीक्षक होंगे तो यहां पर खेल संबंधित सभी गतिविधियां बेहतर तरीके से संचालित होंगी। लेकिन आयुक्त के निर्देशों का जिले में पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। इन निर्देशों का पालन कराने के लिए पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर, संभागीय आयुक्त को भी भेजी गई थी।

जिले में कमी नहीं है पीटीआई की

आयुक्त के पत्र में जिस तरह लिखा गया है कि उनके निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। उससे साबित हो रहा है कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। अगर बात करें तो बैतूल जिले में पर्याप्त संख्या में पीटीआई है और उन्हें अधीक्षक बनाया जा सकता है। शाहपुर में दो पीटीआई हैं जिनमें निलेश तिवारी सीनियर हैं। इसके अलावा अनिल चौहान भी हैं। महिला पीटीआई में विजया गहलोत और निर्मला गुजरे चिचोली में पदस्थ हैं वहीं शिखा सिंह भैंसदेही के धाबा में पदस्थ हैं। यह तीनों महिला पीटीआई स्कूलों में पदस्थ हैं। इसलिए कोई बहाना नहीं है कि बैतूल में पुरूष और महिला पीटीआई की कमी है।

शासन की मंशा नहीं हो रही पूरी | sahayak ayukt

आदिवासी विकास विभाग के द्वारा संचालित क्रीड़ा परिसर के लिए सरकार भारी भरकम बजट देती है। शासन की मंशा होती है कि इन क्रीड़ा परिसर में रहने वाले बच्चे खेल के क्षेत्र में नाम रोशन करें। इसके लिए उन्हें खेल गणवेश, खेल सामग्री की किट और बेहतरीन डाइट दी जाए। इन बच्चों को शासन की मंशा के अनुसार खेल सामग्री या डाइट मिल रही है कि नहीं यह भी जांच का विषय है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले क्रीड़ा अधिकारी पर आरोप लगे थे और घोटाले की जांच की गई थी। जांच प्रतिवेदन आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ कि जो आरोप लगे थे वो सही थे या गलत थे। इसके अलावा उनके ऊपर क्या कार्यवाही की गई। इस संबंध में सहायक आयुक्त बैतूल का पक्ष लेने की कोशिश की गई लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। वहीं बीईओ शाहपुर सुनील कुमार जैन का कहना है ये नियुक्ति बैतूल से होती है इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह सकता।

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