Thursday, August 18, 2022
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Politics : जिले की राजनीति में महिलाओं के बल्ले-बल्ले

नगरीय निकायों में 10 में से 7, जपं में 10 में से 6 महिलाओं के लिए आरक्षित

बैतूल – वर्तमान में प्रदेश सहित जिले में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनारक्षित घोषित हुआ है लेकिन जिले की 10 जनपद पंचायतों में से 6 जनपद पंचायत अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया है। इनमें बैतूल जनपद एससी महिला, चिचोली एसटी महिला, मुलताई अनारक्षित महिला, प्रभात पट्टन एसटी महिला, भैंसदेही एसटी महिला और आठनेर जनपद एसटी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। इस तरह से जिले की 10 जनपदों में से जो 6 जनपद अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुए थे उनमें भी 4 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए रखे गए हैं। इस तरह से जिले की अधिसंख्यक जनपद अध्यक्षों के लिए पुरूष नेताओं की दावेदारी स्वत: समाप्त हो गई है।

इसी तरह की स्थिति हाल ही में नगरीय निकायों के आरक्षण की घोषणा के बाद सामने आई है। जिले की कुल 4 नगर पालिकाओं में से 2 महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई हैं तो बाकी बची दोनों अनुसूचित जाति वर्ग के लिए रिजर्व हो गई हैं। इस तरह से जिले की इन चारों नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के लिए सामान्य वर्ग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों की दावेदारी समाप्त हो गई है। जिला मुख्यालय की बैतूल नगर पालिका परिषद एवं मुलताई नगर पालिका परिषद दोनों अनारक्षित महिला वर्ग के लिए रिजर्व है। वहीं बची आमला एवं सारनी नगर पालिका दोनों में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षण होने से सामान्य और ओबीसी वर्ग के अध्यक्ष पद पर लड़ने से वंचित हो गया है।

नगर परिषदों की बात करें तो जिले की कुल 6 नगर परिषदों में से सिर्फ नई बनी शाहपुर नगर परिषद अनारक्षित घोषित हुई है जहां पहली बार चुनाव हो रहे हैं। लेकिन बची पांचों नगर परिषदें विभिन्न वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई हैं। इनमें नगर परिषद बैतूलबाजार अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, घोड़ाडोंगरी नगर परिषद अनुसूचित जनजाति महिला, आठनेर नगर परिषद अनारक्षित महिला, भैंसदेही नगर परिषद अनारक्षित महिला एवं चिचोली नगर परिषद भी अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हो गई हैं। इस तरह से 6 नगर परिषदों में से 5 नगर परिषद महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गई हैं। सिर्फ शाहपुर नगर परिषद ऐसी रह गई है जहां पुरूष वर्ग अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकता है।

जिले में जनपद अध्यक्ष, नगरपालिका अध्यक्ष एवं नगर परिषद अध्यक्ष के जो पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं उनमें अभी दावेदार और उम्मीदवारों का नाम इसलिए सामने नहीं आ रहे हैं क्योंकि जनपद अध्यक्ष बनने के लिए पहले जनपद सदस्य बनना जरूरी है वहीं नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष बनने के पहले पार्षद बनना जरूरी है, इसलिए अभी अध्यक्ष के नाम की घोषणा दूर की कौड़ी है।

जिस तरह से हर निर्वाचित संस्था में महिलाओं का आरक्षण बढ़ता जा रहा है वहीं अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण पहले से ही निर्धारित है। इसके चलते सामान्य एवं ओबीसी के पुरूष नेताओं को राजनीति करने के लिए सीमित दायरा रह गया है। चूंकि जिले में पहले से ही लोकसभा क्षेत्र एवं 5 में से 3 विधानसभा क्षेत्र एससी, एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है इसलिए इन वर्गों के पुरूष नेताओं के लिए उनकी पार्टी में संगठन में मनोनयन और जिले की कुछ छोटी-मोटी शासकीय समितियों में सदस्य बनने तक सीमित रह गया है।

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