खबरवाणी
पुरानी कृषि उपज मंडी बनी हादसों का केंद्र कीचड़ में उपज बेचने के लिए मजबूर किसान…..
बारिश के बाद सड़कों पर भरा पानी, कीचड़ के बीच उपज बेचने को मजबूर होंगे किसान……
अशोकनगर। पुरानी कृषि उपज मंडी इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का जीवंत उदाहरण बनी हुई है। बारिश का मौसम आते ही मंडी परिसर की स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है। जरा सी बारिश होते ही पूरी मंडी परिसर में कीचड़ का साम्राज्य कायम हो जाता है, जिससे यहां आने-जाने वाले लोगों और किसानों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है । मंडी परिसर की सड़कें जगह-जगह से जर्जर हो चुकी हैं। सड़कों पर इतने गहरे-गहरे गड्ढे हो चुके हैं कि बारिश का पानी जमा होने के बाद सड़क और गड्ढों का अंतर समाप्त हो जाता है। दूर से देखने पर मंडी की मुख्य सड़कें किसी तालाब जैसी नजर आती हैं। आने वाले दिनों में जब खरीफ की फसल तैयार होकर मंडी पहुंचेगी और किसान अपनी साल भर की मेहनत को बेचने यहां आएंगे, तब उन्हें सबसे अधिक परेशानियों से जूझना पड़ेगा।
मंडी परिसर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। कृषि उपज मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों विशेष रूप से मंडी सचिव और उपयंत्री की अनदेखी का खामियाजा क्षेत्र के हजारों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के बाद परिसर में चारों तरफ दलदल जैसी स्थिति बन जाती है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पहिए कीचड़ में फंस जाते हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति निर्मित होती है। जर्जर सड़कों के कारण उपज से लदे वाहनों के पलटने का खतरा हमेशा बना रहता है। पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। मंडी में किसानों के बैठने के लिए समुचित शेड और पीने के साफ पानी तक की व्यवस्था सुचारू रूप से काम नहीं कर रही है। जब मंडी की बुनियादी अधोसंरचना की ही ऐसी दुर्दशा है, तो फिर किसानों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं की उम्मीद किससे की जाए।
शीघ्र ही मंडी में अनाज की आवक में भारी इजाफा होने वाला है। आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों किसान प्रतिदिन अपनी उपज लेकर यहां पहुंचेंगे। यदि समय रहते मंडी परिसर की सड़कों की मरम्मत और कीचड़ की सफाई नहीं कराई गई, तो मंडी परिसर में भारी अव्यवस्था फैलना तय है।गड्डों में भरे पानी के कारण अक्सर किसान दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। उपज से भरी ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलटने से किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि खबर उजागर होने के बाद क्या मंडी प्रशासन की नींद खुलती है या फिर इस बारिश के सीजन में भी किसान इसी कीचड़ और गड्ढों के बीच अपनी फसल बेचने को मजबूर रहेंगे।





