Napier Grass Kheti – अपने खेत में एक बार लगाएं लगाएं ये चारा और चार साल काटें

अच्छे खासे मुनाफे के लिए शुरू कर दें इसकी खेती 

Napier Grass Khetiखेती-किसानी के बाद पशुपालन किसानों की पहली पसंद बन रहा है। कमाई के लिहाज से भी पशुपालन करना किसानों और पशुपालकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है, लेकिन पशुओं से व्यावसायिक उत्पादन तभी सफल होता है जब पशुपालन से जुड़ी सभी मौलिक जानकारी हो। इसके लिए आवश्यक है कि आप अपने पशुओं के देखभाल और उत्तम खाद्य के बारे में जानकारी रखें। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि पोषण से भरपूर हरा चारा दें।

वहीं अधिकांश पशुपालकों के लिए पशुओं के लिए चारा उगाना सरल है क्योंकि वे पशुपालन के साथ खेती भी करते हैं। इस प्रकार, पशुपालकों को ऐसी घास का उत्पादन करना चाहिए जिसे एक बार खेती करके वे कई सालों तक काट कर अपने पशुओं को प्रदान कर सकें। एक ऐसी घास है हाथी घास, जिसे लोग नेपियर के नाम से भी जानते हैं।

पशुओ के लिए बेहद लाभदायक | Napier Grass Kheti 

नेपियर घास किसानों और पशुपालकों के बीच व्यापक लोकप्रियता पा रही है। नेपियर घास पशुओं के लिए उत्कृष्ट चारा है, जो उन्हें अधिक पोषक तत्वों और उत्पादकता प्रदान करता है। इस घास का सेवन करने से पशुओं के दूध उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। पशुपालकों को अपने गाय-भैंसों को हरी-भरी घास के रूप में नेपियर घास देने की सलाह दी जाती है। इस हरी घास में हाथी घास के नाम से प्रसिद्ध नेपियर घास पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।

किस महीने में करें खेती 

हाथी घास की खेती किसानों के लिए सम्भव है, चाहे वह किसी भी मौसम में हो। इसके उत्पादन के लिए नेपियर स्टिक का उपयोग होता है, जिसे खेत में डेढ़ से दो फीट की दूरी पर रोपा जाता है। एक बीघा भूमि में लगभग 8 हजार से ज्यादा डंठल की आवश्यकता होती है। इस घास के डंठल को जुलाई से अक्टूबर और फरवरी में बोया जा सकता है, लेकिन इसके बीज उपलब्ध नहीं होते। साथ ही, इसकी खेती के लिए उचित जल निकास वाली मटियार और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उत्तम होती है।

चार से पांच साल तक लें फसल | Napier Grass Kheti 

यह एक बार बोई जाने के बाद, लगातार चार से पांच सालों तक काटी जाने वाली घास है। हर 02 से 03 महीने में इस घास की ऊँचाई 15 फीट तक पहुंच जाती है। नेपियर घास को बार-बार निराई, गुड़ाई या रासायनिक खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। यह घास बेहद कम खर्च में तैयार होती है और हर 3 महीने में एक बीघा के क्षेत्र में कटाई से किसान 20 टन से अधिक उत्पादन हासिल कर सकता है।

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