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शहर के होटल-दुकानों और कुल्फी-पेप्सी कारखानों में नाबालिगों से काम! जिम्मेदार विभाग की चुप्पी
बुरहानपुर। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के कई होटलों, दुकानों तथा कुल्फी-पेप्सी बनाने वाले कारखानों में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का मामला सामने आ रहा है। गर्मी के मौसम और स्कूलों की छुट्टियों के दौरान यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है। परीक्षा समाप्त होते ही कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हो जाते हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के नाम पर खामोश नजर आ रहे हैं।
शहर में होटलों, चाय-नाश्ते की दुकानों, ठेलों तथा कुल्फी-पेप्सी निर्माण इकाइयों में कम उम्र के बच्चों से घंटों तक काम कराया जा रहा है। कई स्थानों पर बच्चों से सफाई, सामान उठाने, बर्तन धोने, कुल्फी-पेप्सी पैकिंग और अन्य श्रमसाध्य कार्य करवाए जा रहे हैं। यह न केवल उनके बचपन के साथ अन्याय है, बल्कि शिक्षा के अधिकार का भी खुला उल्लंघन है।
सूत्र बताते हैं कि परीक्षा के बाद स्कूलों की छुट्टियां लगते ही कुछ अभिभावक आर्थिक तंगी या चंद पैसों के लालच में अपने बच्चों को काम पर भेज देते हैं। कई बच्चे परिवार की मजबूरी के चलते कम उम्र में ही मजदूरी करने को विवश हो जाते हैं। इससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है और शिक्षा से उनका जुड़ाव टूटता जा रहा है।
कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी व्यवसायिक प्रतिष्ठान, होटल, दुकान या कारखाने में काम कराना प्रतिबंधित है। वहीं बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों से जोखिमपूर्ण कार्य कराना भी अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ जुर्माना और सजा का स्पष्ट प्रावधान है।
इसके बावजूद यदि शहर में खुलेआम नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा है तो यह संबंधित विभागों की निष्क्रियता को दर्शाता है। संबंधित विभाग, जिम्मेदारी है कि वे नियमित निरीक्षण करें और बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें।
शहरवासियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से होटल संचालकों, दुकानदारों और कारखाना मालिकों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कार्रवाई के अभाव में वे यह भी नहीं सोचते कि नाबालिग बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने शहर में विशेष जांच अभियान चलाकर होटलों, दुकानों और कुल्फी-पेप्सी कारखानों की जांच की जाए। जहां भी नाबालिग बच्चे काम करते पाए जाएं, वहां संबंधित संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जाए।
विभागो से सीधे सवाल
क्या श्रम विभाग ने हाल के दिनों में ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच की है?
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नाबालिगों से काम कराने वालों पर शिकंजा कब कसेगा प्रशासन?
बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेंगे?
यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या समाज के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है और बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा सकता है।





