Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

ग्राम पंचायत रांवसर में 5वें वित्त निधि में बड़ा फर्जीवाड़ा बिना हस्ताक्षर के व्हाऊचर पास…..

By
On:

खबरवाणी

ग्राम पंचायत रांवसर में 5वें वित्त निधि में बड़ा फर्जीवाड़ा बिना हस्ताक्षर के व्हाऊचर पास…..

सरपंच प्रतिनिधि के बेटे को बिना हस्ताक्षरित व्हाऊचरों पर बांटी लाखों की राशि फर्जीवाड़े की आशंका …..

अशोकनगर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ जनपद पंचायत अशोकनगर की ग्राम पंचायत रांवसर में सरकारी राशि के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर उजागर हुआ है। ग्राम पंचायत को विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए मिले ‘पांचवें वित्त आयोग’ के बजट में व्यापक स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत निधि से लाखों रुपये का भुगतान किसी अधिकृत ठेकेदार, पंजीकृत एजेंसी या नियमानुसार काम करने वाले श्रमिक को न करके सीधे सरपंच प्रतिनिधि रंजीत सिंह यादव के पुत्र गौरव यादव के नाम पर कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन बिलों और वाउचरों के आधार पर शासकीय कोष से यह भारी-भरकम राशि जारी की गई, उन पर न तो ग्राम पंचायत के सरपंच के हस्ताक्षर हैं, न ही पंचायत सचिव और न ही किसी प्रशासनिक या तकनीकी उत्तरदायी अधिकारी के स्वीकृत दस्तखत दर्ज हैं। शासकीय नियमों के तहत पंचायती राज व्यवस्था में किसी भी प्रकार के निर्माण, मरम्मत या सेवा के बदले भुगतान करने की एक तय प्रक्रिया होती है। सबसे पहले कार्य का मूल्यांकन होता है, जिसके बाद उप-यंत्री और सहायक यंत्री की तकनीकी स्वीकृति मिलती है। इसके बाद पंचायत सचिव एवं सरपंच डिजिटल सिग्नेचर या भौतिक हस्ताक्षरों के माध्यम से बिलों को पास करते हैं। किंतु, रांवसर ग्राम पंचायत में इन सभी नियमों और प्रशासनिक निर्देशों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। प्रस्तुत मामले में कई ऐसे वाउचर और बिल फाइल का हिस्सा बने हुए हैं, जिनमें बिल पर न तो संबंधित वेंडर या भुगतान पाने वाले के स्पष्ट हस्ताक्षर हैं और न ही किसी सक्षम प्राधिकारी की मुहर। सरकारी खजाने से सीधे सरपंच प्रतिनिधि रंजीत सिंह यादव के पुत्र गौरव यादव को व्यक्तिगत रूप से लाखों रुपये स्थानांतरित किए गए। किस काम, किस सामग्री या किस सेवा के एवज में यह राशि दी गई, इसका कोई ठोस ब्यौरा दस्तावेजों में मौजूद नहीं है। ग्राम पंचायत रांवसर में काफी समय से विकास कार्यों में सुस्ती और कागजी कामकाज पर सवाल उठ रहे थे। जब हाल ही में ग्राम पंचायत के पांचवें वित्त आयोग के खातों और व्यय विवरण का अवलोकन किया गया, तब इस पूरे खेल का खुलासा हुआ।

इस पूरे घोटाले ने अशोकनगर जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि बिना सत्यापित बिलों और बिना अधिकृत हस्ताक्षरों के पंचायत के सरकारी खाते से पैसा निकल कैसे गया क्या जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और ब्लॉक स्तर के लेखापालों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं थी पंचायती राज अधिनियम के तहत ‘सरपंच प्रतिनिधि’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद रंजीत सिंह यादव द्वारा पंचायत का कामकाज संचालित करना और उनके पुत्र गौरव यादव को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाया जाना सत्ता और पद के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

अशोकनगर जिला हमेशा से ही पंचायती राज में पारदर्शिता को लेकर चर्चा में रहता है, लेकिन रांवसर ग्राम पंचायत के इस फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक दावों की हवा निकाल दी है। बिना हस्ताक्षर के बिलों पर लाखों का भुगतान होना केवल एक लिपिकीय गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय अपराध प्रतीत होता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के मीडिया और जनमानस में आने के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर सरकारी धन की वसूली होगी या फिर यह मामला भी केवल कागजी जांच और फाइलों के पुलिंदों में दबकर रह जाएगा क्षेत्र के लोग अब प्रशासन के रुख का इंतजार कर रहे हैं।

For Feedback - feedback@example.com

Related News

Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News