खबरवाणी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों अनदेखी……नदियों में ही विसर्जित हो रहीं मूर्तियां, प्रशासन ने नहीं बनाए विसर्जन कुंड
आमला। एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय के जल संरक्षण गाइडलाइन की सरेआम अवहेलना, 68 ग्राम पंचायतों के
154 गांवों में एक भी कृत्रिम कुंड नहीं, भगवान कृष्ण और गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से बढ़ रहा जल प्रदूषण
आमला। जनपद पंचायत आमला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में इन दिनों स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी की गई सख्त गाइडलाइन की ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम अवहेलना की जा रही है। देश की सर्वोच्च अदालत ने जल प्रदूषण को रोकने और नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी सार्वजनिक जलाशय या नदी में मूर्तियों का सीधा विसर्जन नहीं किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को हर विसर्जन स्थल पर अलग से कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आमला क्षेत्र में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया है।
रात के अंधेरे में जान जोखिम में डाल रहे श्रद्धालु, कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही तस्वीरें बेहद डरावनी हैं। रात के घने अंधेरे में युवा और ग्रामीण बिना किसी सुरक्षा घेरे, लाइफ जैकेट या गोताखोरों की मौजूदगी के गहरे पानी में उतरकर मूर्तियों का विसर्जन करने को मजबूर हैं। प्रशासन ने घाटों पर न तो रोशनी की कोई पर्याप्त व्यवस्था की है और न ही किसी हादसे से निपटने के लिए पुलिस बल या पंचायत कर्मियों की तैनाती की गई है। यदि इस बीच कोई अप्रिय घटना या जल जनित हादसा होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय जनपद प्रशासन और ग्राम पंचायत सचिवों की होगी।
68 पंचायतों के 154 गांवों में एक भी कृत्रिम कुंड नहीं
जनपद पंचायत आमला के अंतर्गत आने वाली 68 ग्राम पंचायतों के लगभग 154 गांवों में से एक भी जगह प्रशासन द्वारा विसर्जन कुंड की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से चल रहे भगवान श्री गणेश उत्सव के बाद प्रतिमाओं को सीधे स्थानीय नदियों, तालाबों और घाटों के गहरे पानी में विसर्जित किया जा रहा है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि अंधेरे में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी के बीचों-बीच जाकर भारी मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं। प्रशासन ने न तो सुरक्षा के इंतजाम किए हैं और न ही पर्यावरण को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया है।
जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी, केवल कागजों पर दौड़ रहे आदेश
नियमों के मुताबिक, त्योहार शुरू होने से पहले ही हर ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र में गड्ढे खोदकर या कृत्रिम टैंक बनाकर विसर्जन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी थी। लेकिन आमला जनपद के विभागीय अधिकारियों ने एयरकंडीशंड दफ्तरों में बैठकर केवल कागजी आदेश जारी किए, जिनका धरातल पर क्रियान्वयन शून्य रहा। जब ग्रामीणों से इस संबंध में बात की गई, तो उनका साफ कहना था कि पंचायत स्तर पर उन्हें कोई वैकल्पिक विसर्जन स्थल नहीं बताया गया, जिसके कारण वे परंपरागत रूप से बहती नदियों में ही विसर्जन करने को मजबूर हैं।
कागजों तक सीमित रहे पर्यावरण संरक्षण के दावे
नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के सरकारी दावे केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते यदि विसर्जन कुंडों का निर्माण कराया जाता, तो प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता था। जागरूकता के अभाव और प्रशासनिक ढुलमुल रवैए के कारण हर साल यही स्थिति बनती है, जिससे क्षेत्र की नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। इस घोर लापरवाही पर अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया है, जिससे स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है।
इनका कहना है
जनपद पंचायत सीईओ आमला
पंकज दारोथिया
मो. 94256 50392
तीन दिवस से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन अधिकारी द्वारा जवाब से बचने के लिए कॉल नहीं उठाया जा रहा है
इनका कहना है
अनुविभागीय अधिकारी आमला
कामिनी ठाकुर
विसर्जन स्थल को लेकर शासन ब्लॉक की सभी ग्रामों में मूर्ति विसर्जन स्थल पर जल प्रदूषण एवं पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए मूर्ति विसर्जन के लिए कुंड बनाकर विसर्जन करने की दिशा निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में जनपद सीईओ से बात करती हु।





