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दशलक्षण महापर्व में उमड़ रहा भक्ति का सैलाब , मुनिश्री कुंथुसागर महाराज के सानिध्य में त्याग व आकिंचन्य धर्म का संदेश
बुरहानपुर नि.प्र. – श्री सकल दिगंबर जैन समाज, बुरहानपुर में परम पूज्य मुनिश्री 108 कुंथुसागर महाराज के पावन सानिध्य में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर राजपुरा एवं श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रतिदिन अभिषेक, पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ,श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री कुंथुसागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक शिविर के अंतर्गत श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद प्रतिदिन दशलक्षण धर्मों पर प्रवचन हो रहे हैं। दोपहर में तत्व चर्चा, शाम को प्रतिक्रमण, आचार्य भक्ति एवं भव्य आरती तथा रात्रि में क्षुल्लक श्री अटल महाराज के प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में समाज के बच्चे, युवा एवं बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।
उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन करते हुए मुनिश्री कुंथुसागर महाराज ने कहा कि त्याग के दो प्रमुख रूप हैं। अपनी वस्तु को दूसरों के उपकार के लिए देना दान कहलाता है, जबकि अपनी वस्तु का इस प्रकार त्याग करना कि स्वयं का भी कल्याण हो और दूसरों का भी कल्याण हो, त्याग धर्म है। राग-द्वेष आदि अशुभ परिणामों का त्याग करना भी उत्तम त्याग धर्म है। तप एवं दान के माध्यम से व्यक्ति त्याग धर्म का साधक बनता है । उत्तम आकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिश्री ने कहा कि अपनी आत्मा के अतिरिक्त अंदर-बाहर कुछ भी मेरा नहीं है, ऐसी भावना रखना ही आकिंचन्य धर्म है। परिग्रह का त्याग कर आत्मा के आनंद की अनुभूति करना चाहिए।
समाज के प्रमोद जैन बड़जात्या एवं महेंद्र जैन लुहाड़िया ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के सभी धार्मिक आयोजनों में समाजजन उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं । दशलक्षण महापर्व में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य रिखबचंद्र अमित कुमार पाटोदी, भागचंद गौरव कुमार गंगवाल, वीरेंद्र कुमार सौरभ कुमार बड़जात्या, मोहनलाल लोकेश कुमार ठोलिया, दिनेश कुमार रमेश कुमार जैन, चंद्रकांत गौरव कुमार लुहाड़िया को प्राप्त हुआ l
सलग्न छायाचित्र l





