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बंदरों के आतंक से मुक्ति के लिए महापंचायत, पहले दिन जुटे 40 हजार रुपए

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खबरवाणी

बंदरों के आतंक से मुक्ति के लिए महापंचायत, पहले दिन जुटे 40 हजार रुपए

चार से पांच लाख रुपए की लागत से चलेगा अभियान, ग्रामीणों के सहयोग से बुलायी जाएगी विशेषज्ञ टीम

भौंरा। नगर में बढ़ते बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के उद्देश्य से रविवार को रामलीला चौक स्थित शिव मंदिर परिसर में महापंचायत का आयोजन किया गया। बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नगर में आतंक का कारण बने बंदरों को पकड़ने के लिए बाहर से विशेषज्ञ टीम बुलायी जाएगी और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा।

बैठक में वन विभाग की ओर से रेंजर विजेंद्र तिवारी, डिप्टी रेंजर मूलचंद परते, ग्राम पंचायत मोहरा की सरपंच मीरा धुर्वे, सचिव राजू पंडागरे सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

महापंचायत में बताया गया कि नगर और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। आए दिन लोगों पर हमले, घरों और दुकानों में घुसकर नुकसान पहुंचाने तथा राहगीरों को परेशान करने की घटनाओं से लोगों में भय का माहौल है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए बंदरों को पकड़ने वाली विशेषज्ञ टीम से संपर्क किया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार पूरे अभियान में लगभग चार से पांच लाख रुपए तक का खर्च आने की संभावना है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इतनी बड़ी राशि जनसहयोग से जुटाई जाएगी। महापंचायत के दौरान ही पहले दिन करीब 40 हजार रुपए का सहयोग प्राप्त हुआ, जबकि अनेक नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने आगे भी आर्थिक सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

अशोक सिरोटिया ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बंदरों की समस्या अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह जनसुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नगर में कई लोग बंदरों के हमलों में घायल हो चुके हैं और लोग भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि बंदरों को किसी प्रकार की हानि पहुंचाए बिना सुरक्षित रूप से पकड़कर जंगल में छोड़ा जाएगा।

महापंचायत में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि अभियान की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गांव के 10 लोगों की एक समिति गठित की जाएगी। समिति चंदा संग्रह, खर्च का लेखा-जोखा रखने तथा बंदर पकड़ने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। समिति समय-समय पर अभियान की जानकारी सार्वजनिक भी करेगी।

वन विभाग एवं ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने अभियान में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि नगर के प्रत्येक नागरिक के सहयोग से इस अभियान को सफल बनाकर बंदरों के आतंक से स्थायी राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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