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चिलोरे में करोड़ों की लागत से बना अस्पताल आज भी सफेद हाथी!
अस्पताल भवन तैयार, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं अब तक शुरू नहीं — ग्रामीण आखिर जाएं तो जाएं कहां?
चिलोरे में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित अस्पताल भवन आज भी चालू होने का इंतजार कर रहा है। अस्पताल का भवन धीरे-धीरे जर्जर और खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है।
आदिवासी बहुल क्षेत्र के ग्रामीणों को आज भी इलाज के लिए भीमपुर और बैतूल जाना पड़ रहा है।
गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में लंबी दूरी तय करना ग्रामीणों के लिए परेशानी के साथ-साथ जान का जोखिम भी बन जाता है।
जब क्षेत्र की जनता के लिए अस्पताल भवन बनाया गया है, तो फिर उसमें स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने में आखिर इतनी देरी क्यों?
ग्रामीणों का सवाल —
करोड़ों की लागत से बनी यह बिल्डिंग कब बनेगी अस्पताल?
चिलोरे और आसपास के आदिवासी क्षेत्र को स्वास्थ्य सुविधा आखिर कब मिलेगी?
सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर अस्पताल को आवश्यक डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं के साथ जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधा कोई एहसान नहीं, ग्रामीणों का अधिकार है।




