HometrendingJammu Kashmir - धारा 370 हटाना केंद्र का फैसला सही - सुप्रीम...

Jammu Kashmir – धारा 370 हटाना केंद्र का फैसला सही – सुप्रीम कोर्ट

जम्मू-कश्मीर में 30 सितम्बर चुनाव कराने के दिए आदेश

Jammu Kashmirनई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से हटाई गई धारा 370 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो दर्जन याचिका लगाकर चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए 5 जजों की बैंच ने साक्ष्य, बहस के उपरांत सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई ने अपना फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार के फैसले को सही बताया। सीजेआई श्री चंद्रचूड़ ने सोमवार को कहा – आर्टिकल 370 अस्थायी प्रावधान था।

संविधान के अनुच्छेद 1 और 370 से स्पष्ट है कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारतीय संविधान के सभी प्रावधान वहां लागू हो सकते हैं। केंद्र ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से 370 हटा दिया था। इसके 4 साल, 4 महीने और 6 दिन बाद आए फैसले में कोर्ट ने कहा, हम आर्टिकल 370 को निरस्त करने के लिए जारी राष्ट्रपति के आदेश को वैध मानते हैं। हम लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले की वैधता को भी बरकरार रखते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने के आदेश दिए।

खिलाफ में लगी थी 23 याचिकाएं | Jammu Kashmir

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था। साथ ही राज्य को 2 हिस्सों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। 5 जजों की बेंच ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की थी। संविधान पीठ में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस कौल और जस्टिस खन्ना शामिल थे। बेंच के सामने लगातार 16 दिन तक चली सुनवाई 5 सितंबर को खत्म हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यानी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के 96 दिन बाद केस पर फैसला सुनाया।

चीफ जस्टिस बोले- केंद्र के हर फैसले को नहीं दे सकते चुनौती

सीजेआई ने कहा कि केंद्र की तरफ से लिए गए हर फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसा करने से अराजकता फैल जाएगी। अगर केंद्र के फैसले से किसी तरह की मुश्किल खड़ी हो रही हो, तभी इसे चुनौती दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील खारिज कर दी कि राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकता, जिसमें बदलाव न किया जा सके।

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि आर्टिकल 356 के बाद केंद्र केवल संसद के द्वारा कानून ही बना सकता है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। सीजेआई ने बताया कि फैसले में 3 जजों के जजमेंट हैं। एक फैसला चीफ जस्टिस, जस्टिस गवई और जस्टिस सूर्यकांत का है। दूसरा फैसला जस्टिस कौल का है। जस्टिस खन्ना दोनों फैसलों से सहमत हैं।सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह फैसला सर्वसम्मति से फैसला लिया। हालांकि फैसला सिर्फ चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने पढ़ा।

नहीं है आंतरिक संप्रभूता | Jammu Kashmir

प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन वैध था या नहीं, इस पर हम विचार ही नहीं कर रहे हैं क्योंकि इसे किसी ने चुनौती नहीं दी थी। राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र की ओर से लिए गए हर फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती। जम्मू-कश्मीर के पास देश के अन्य राज्यों से अलग कोई आंतरिक संप्रभुता  नहीं है। संविधान का आर्टिकल 370 अस्थायी था, इसे रद्द करने की राष्ट्रपति की शक्ति अभी भी मौजूद है। जम्मू-कश्मीर युद्ध की स्थिति के कारण अंतरिम तौर पर इसे लाया गया था। जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा को कभी भी परमानेंट बॉडी बनने का इरादा नहीं था।

जब जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का अस्तित्व खत्म हो गया तो जिस विशेष शर्त के लिए आर्टिकल 370 लागू किया गया था, उसका भी अस्तित्व खत्म हो गया। जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश भारत के राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति की उद्घोषणा की वैधता पर फैसला देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती नहीं दी। चीफ जस्टिस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने जब भारत में शामिल हुआ तो उसकी संप्रभुता नहीं रह जाती है। साभार 

RELATED ARTICLES

Most Popular