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बुरहानपुर जिले में आंधी-तूफान और बारिश से भारी तबाही

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खबरवाणी

बुरहानपुर जिले में आंधी-तूफान और बारिश से भारी तबाही

किसानों की कमर टूटी, लाखों–करोड़ों का अनुमानित नुकसान

बुरहानपुर
जिले में बीते दिनों अचानक आई तेज़ आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्राकृतिक कहर से सबसे ज़्यादा नुकसान जिले के अन्नदाताओं यानी किसानों को झेलना पड़ा है। खेतों में खड़ी और तैयार फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं, वहीं बिजली व्यवस्था और आवासीय ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार जिले के ग्रामीण और शहरी अंचलों में तेज़ हवा के साथ हुई बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जो फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, वे ज़मीन पर बिछ गईं, वहीं कुछ खेतों में पानी भर जाने से उपज पूरी तरह खराब हो गई। इससे किसानों को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
मेहनत पर फिरा पानी, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज़ लेकर, मेहनत-मजदूरी कर फसल बोई थी ताकि फसल बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर सकें और पुराने कर्ज़ चुका सकें। लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। खेतों में खड़ी फसलें आंधी-तूफान में गिर गईं और बारिश से सड़ गईं।
कई किसानों ने बताया कि अगर मौसम साफ रहता तो अगले कुछ ही दिनों में फसल की कटाई शुरू होनी थी। अब स्थिति यह है कि न फसल बची और न ही लागत निकलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि वे आगे खेती कैसे करें और परिवार का गुज़ारा कैसे चले।
बिजली व्यवस्था चरमराई, पेड़ गिरे, मकानों के पत्र उड़े
आंधी-तूफान का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा। जिले के कई इलाकों में बिजली के खंभे और तार टूट गए, जिससे घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।
तेज हवा के कारण कच्चे और अर्ध-पक्के मकानों के टीन-शेड और पत्र उड़ गए। इससे गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। बारिश के बाद घरों में पानी भरने से घरेलू सामान भी खराब हो गया।

गरीबों के लिए दोहरी मार, ‘जाएं तो कहां जाएं?’

प्राकृतिक आपदा ने गरीब परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। जिनके पास पक्के मकान नहीं हैं, उनके आशियाने पूरी तरह उजड़ गए। ऐसे परिवार अब प्रशासन और सरकार की ओर मदद की आस लगाए बैठे हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके पास न तो रहने का सुरक्षित ठिकाना बचा है और न ही नुकसान की भरपाई करने के साधन।

प्रशासन से मुआवज़े और सर्वे की मांग

किसानों और प्रभावित नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और शासन की आपदा राहत नीति के तहत उचित मुआवज़ा दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो कई परिवार आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि बिजली व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए और जिन क्षेत्रों में पेड़ व बिजली के खंभे गिरे हैं, वहां तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएं।
प्राकृतिक आपदा से उबरने की चुनौती
आंधी-तूफान और बारिश से हुए इस नुकसान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने किसान और गरीब वर्ग सबसे अधिक असुरक्षित है। अब देखना यह है कि प्रशासन और शासन स्तर पर कितनी तेजी से राहत और मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
फिलहाल बुरहानपुर जिले के किसान और प्रभावित परिवार आसमान की ओर नहीं, बल्कि सरकारी मदद की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

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