Globle Hunger Index 2022: में भारत की स्थिति और खराब हुई है. वह 121 देशों में 107वें नंबर पर पहुंच गया है, जबकि बच्चों में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश से सबसे अधिक है. इस रैंकिग पर मोदी सरकार ने सवाल उठाए हैं. सरकार ने कि Global Hunger Index 2022 में भारत को 107वें स्थान पर रखना देश की छवि को ‘‘एक राष्ट्र जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है’’ के रूप में खराब किए जाने के लगातार प्रयास का हिस्सा है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Global Hunger Index 2022 (GHI) के जरिए वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर भूख पर नजर रखी जाती है और उसकी गणना की जाती है. 29.1 अंकों के साथ भारत में भूख का स्तर ‘‘गंभीर’’ है.
Globle Hunger Index 2022:
Globle Hunger Index 2022 की स्थिति जान बीजेपी नेता भड़के BJP leaders furious to know the status of Global Hunger Index 2022
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Globle Hunger Index 2022 की स्थिति जान बीजेपी नेता भड़के,कोरोना कॉल में जिन्हे हमने दिया भोजन आज उनकी स्थिति भारत से बेहतर
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बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने एक ट्वीट के जरिए हंगर इंडेक्स पर ही सवाल उठाए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अनाज की क़िल्लत से उनके देश में कोई भूख से ना मरे इसलिए भारत से अनाज की मदद ली, वो इंडेक्स में हमसे आगे कैसे. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अपने देश में 80 करोड़ लोगो को कोरोना के चलते 2.5 साल तक मुफ़्त राशन भी दिया, तो भला Global Hunger Index 2022 में वो कैसे पीछे?
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कोरोना कॉल में जिन्हे हमने दिया भोजन आज उनकी स्थिति भारत से बेहतर Those whom we gave food in Corona call today their condition is better than India
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गौरतलब है कि 109वीं रैंकिंग पर मौजूद अफगानिस्तान एशिया महाद्वीप में एकमात्र देश है जो भारत से पीछे है, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और बांग्लादेश और आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की स्थिति भी भारत से बेहतर बताई गई है. भारत 2021 में 116 देशों में 101वें नंबर पर था जबकि 2020 में वह 94वें पायदान पर था. पड़ोसी देश पाकिस्तान (99), बांग्लादेश (84), नेपाल (81) और श्रीलंका (64) भारत के मुकाबले कहीं अच्छी स्थिति में हैं. एशिया में केवल अफगानिस्तान ही भारत से पीछे है और वह 109वें स्थान पर है.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक भूख के स्तर वाले क्षेत्र, दक्षिण एशिया में बच्चों में नाटापन की दर (चाइल्ड स्टंटिंग रेट) सबसे अधिक है. इसमें कहा गया है, ‘‘भारत में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे अधिक है और भारत की बड़ी आबादी के कारण यह इस क्षेत्र के औसत को बढ़ाता है.’’ भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बच्चों में नाटापन की दर (चाइल्ड स्टंटिंग रेट) 35 से 38 फीसदी के बीच है और क्षेत्र में अफगानिस्तान में यह दर सबसे अधिक है.
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भारत में अल्पपोषण की व्यापकता 2018-2020 में 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 2019-2021 में 16.3 हो गयी है। इसका मतलब है कि दुनियाभर के कुल 82.8 करोड़ में से भारत में 22.43 करोड़ की आबादी अल्पपोषित है. पांच साल की आयु तक के बच्चों में मृत्यु दर के सबसे बड़े संकेतक ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ की स्थिति भी बदतर हुई ह. 2012-16 में 15.1 प्रतिशत से बढ़कर 2017-21 में यह 19.3 प्रतिशत हो गया है. हालांकि, भारत ने दो मानदंडों पर बेहतर प्रदर्शन भी किया है. बच्चों में नाटापन जो 2012-16 में 38.7 फीसदी था वह घटकर 2017-21 में 35.5 फीसदी रह गया. वहीं, मृत्यु दर जो 2014 में 4.6 प्रतिशत था वह 2020 में घटकर 3.3 प्रतिशत रह गया है.
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सरकार ने कहा कि यह Global Hunger Index 2022 की रिपोर्ट ना सिर्फ जमीनी हकीकत से परे है बल्कि इसमें जानबूझ कर सरकार द्वारा आबादी की खाद्य सुरक्षा, खास तौर पर कोविड के दौरान, किए गए प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया गया है. मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत की छवि को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में धूमिल करने के लिए जारी प्रयास एक बार फिर दिखाई दे रहा है, जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है. गलत सूचना साझा करना वैश्विक भूख सूचकांक की पहचान बनता दिख रहा है. Read Also: दिल दहला देगा ये विडियो जिराफ के बच्चे को शेरनी चाह रही थी निगलना,लेकिन माँ का दिल नहीं माना जिराफ ने किया कुछ ऐसा देखे
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Global Hunger Index 2022 में भारत की स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को 8.5 वर्ष में भारत को अंधकार के इस युग में लाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री बच्चों में कुपोषण, भूख, नाटेपन और ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ जैसे वास्तविक मुद्दों से कब निपटेंगे? भारत में 22.4 करोड़ लोगों को अल्पपोषित माना जा रहा है.’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर रही है.






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